Edited By Anil Jangid, Updated: 04 Jan, 2026 07:06 PM

जयपुर। राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद निर्वाचन विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को एक महीने तक आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया था। इस...
जयपुर। राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद निर्वाचन विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को एक महीने तक आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया था। इस अवधि में राजनीतिक दलों की ओर से बड़ी संख्या में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े आवेदन सामने आए हैं।
निर्वाचन विभाग के अनुसार अब तक कुल 373 नाम जोड़ने के लिए आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जबकि 6 नाम हटाने के लिए आवेदन आए हैं। इनमें सबसे अधिक आपत्तियां भारतीय जनता पार्टी की ओर से दर्ज कराई गई हैं। भाजपा ने 193 नाम जोड़ने और 4 नाम हटाने के लिए आवेदन दिया है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने 178 नाम जोड़ने और 2 नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराई है। इसके अलावा भारत आदिवासी पार्टी ने भी 2 नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 27 अक्टूबर से 16 दिसंबर के बीच नाम जोड़ने के लिए 1 लाख 91 हजार 267 फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं, जबकि नाम हटाने के लिए 24 हजार 616 आवेदन आए हैं। SIR अभियान के बाद करीब 41.85 लाख मतदाताओं को “अनकलेक्टेड” श्रेणी में रखा गया है। इनमें वे मतदाता शामिल हैं, जो अभियान के दौरान अपने पते पर नहीं मिले, स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो गए या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इन मतदाताओं के वोट हटाए जाने की संभावना है।
इसके अलावा निर्वाचन विभाग 8 लाख 29 हजार 710 मतदाताओं को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। ये मतदाता “अनमैप्ड” श्रेणी में हैं, जिनके स्वयं या माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी को एक महीने का समय दिया जाएगा, ताकि वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।