Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Feb, 2026 01:47 PM

बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के खिलाफ चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। कलेक्ट्रेट के सामने महापड़ाव का चौथा दिन है और 480 से अधिक पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर हैं। इस बीच अनशनकारी किशनलाल...
बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के खिलाफ चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। कलेक्ट्रेट के सामने महापड़ाव का चौथा दिन है और 480 से अधिक पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर हैं। इस बीच अनशनकारी किशनलाल खीचड़ के बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर उनकी जान गई तो आने वाले समय में नेतागिरी करने वालों को जनता वोट की चोट देगी।
किशनलाल ने NDTV राजस्थान से बातचीत में कहा, “हम मर जाएंगे पर झुकेंगे नहीं। हमारी मांग विश्व कल्याण के लिए है, लेकिन पार्टियां इस पर राजनीति कर रही हैं। हमने वोट देकर प्रधानमंत्री, सीएम और एमपी बनाए, लेकिन सरकार मां-बाप होने के बावजूद हमें मरने के लिए छोड़ रही है।” उन्होंने सीधे तौर पर राजनीतिक दलों को चेतावनी दी कि अब वे नेताओं को वोट नहीं देंगे और देश के युवाओं को दूसरी पार्टियों को मौका देंगे। किशनलाल ने कहा कि वे गुरु जंभेश्वर के 29 नियम मानने वाले बिश्नोई समाज के अनुयायी हैं और अपने आदर्शों पर किसी भी हाल में समझौता नहीं करेंगे।
अनशन के कारण अब तक 70 से अधिक लोगों की तबीयत गंभीर हो चुकी है। बिश्नोई धर्मशाला को अस्थाई अस्पताल बनाया गया है। गंभीर रूप से बीमार संत लालदास, मांगीलाल, सुभाषचंद्र और गोरधन दास को PBM अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें (CMHO डॉ. पुखराज साध के नेतृत्व में) लगातार मौके पर तैनात हैं, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी स्थिति अब ‘मरने जैसी’ हो गई है।
आंदोलन की गूंज बीकानेर से जोधपुर तक सुनाई दी। देर रात बीकानेर की सड़कों पर विशाल कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। संतों ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि यदि खेजड़ी संरक्षण कानून (Tree Act) पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।
आंदोलन की मुख्य वजह खेजड़ी के पेड़ों की कटाई है। पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर बीकानेर संभाग में सोलर पावर प्रोजेक्ट और विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। आंदोलनकारियों की मांगें स्पष्ट हैं: खेजड़ी संरक्षण के लिए विशेष कानून, कटाई पर सख्त जुर्माने और अवैध कटाई पर FIR, साथ ही खेजड़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया जाए।
480 से अधिक पर्यावरण प्रेमी, संत और स्थानीय लोग इस आंदोलन के माध्यम से सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि खेजड़ी की कटाई रोकने और संरक्षण सुनिश्चित करने में अब ठोस कदम उठाए जाएं।