Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Jan, 2026 02:59 PM

बीकानेर। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में कड़ाके की सर्दी ने असाधारण रूप ले लिया है। बीकानेर जिले का खाजूवाला क्षेत्र, जो भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब स्थित है, इन दिनों भीषण शीतलहर की चपेट में है। न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु के...
बीकानेर। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में कड़ाके की सर्दी ने असाधारण रूप ले लिया है। बीकानेर जिले का खाजूवाला क्षेत्र, जो भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब स्थित है, इन दिनों भीषण शीतलहर की चपेट में है। न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे न सिर्फ आम जनजीवन बल्कि सीमावर्ती इलाकों की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
सुबह के समय खाजूवाला बॉर्डर क्षेत्र में हालात और भी कठोर नजर आए, जब ओस की बूंदें जमकर बर्फ की पतली परत में तब्दील हो गईं। खुले मैदानों, खेतों, रेत के टीलों और सीमा के आसपास के इलाकों में जमी बर्फ ने यह साफ कर दिया कि रेगिस्तान में सर्दी इस बार असामान्य रूप से तीखी है। गर्मियों में झुलसाने वाली धरती का इस तरह जम जाना स्थानीय लोगों के लिए भी चौंकाने वाला दृश्य रहा।
भीषण ठिठुरन के चलते सीमावर्ती गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सुबह और देर रात के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए यह सर्दी रोजमर्रा की चुनौतियों को और कठिन बना रही है।
तेजी से गिरते तापमान ने किसानों और पशुपालकों की चिंता भी बढ़ा दी है। खाजूवाला क्षेत्र में फसलों, चारे और पशुओं पर पाले का खतरा मंडराने लगा है। यदि शीतलहर का यह दौर लंबा खिंचता है, तो कृषि और पशुपालन से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जो पहले ही जलवायु और भौगोलिक कठिनाइयों से जूझते हैं।
रणनीतिक दृष्टि से भी भारत–पाक सीमा के नजदीक इस तरह की सर्दी पर नजर रखी जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में मौसम का सीधा असर गतिविधियों और निगरानी व्यवस्थाओं पर पड़ता है, जिससे ठंड के इस प्रकोप को गंभीरता से देखा जा रहा है।
मौसम विभाग ने पूरे क्षेत्र में शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों और पशुपालकों से अपील की गई है कि वे फसलों और पशुओं को पाले और ठंड से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, क्योंकि रेगिस्तान इस समय सर्दी के सबसे कठोर दौर से गुजर रहा है।