Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 17 Mar, 2026 06:36 PM

उदयपुर में एक अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पुलिसकर्मियों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अपनी थाने की कुक के बेटे की शादी में भाई का फर्ज निभाया।
पुलिसकर्मियों ने निभाया भाई का फर्ज
उदयपुर में एक अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पुलिसकर्मियों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अपनी थाने की कुक के बेटे की शादी में भाई का फर्ज निभाया।
प्रतापनगर थाने में करीब 25 साल से सेवाएं दे रही मीराबाई के बेटे की शादी में जब उसके अपने भाई मायरा लेकर नहीं पहुंचे, तो पुलिसकर्मी ही परिवार बनकर आगे आए और पूरे रीति-रिवाज के साथ मायरा भर दिया।
25 साल से थाने में सेवा दे रही हैं मीराबाई
मीराबाई पिछले 25 वर्षों से प्रतापनगर थाने में पुलिसकर्मियों के लिए खाना बनाने और अन्य कामों की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इस दौरान उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों का दिल जीत लिया।
रविवार को जब उनके बेटे मुकेश गायरी की शादी थी, तो थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित सहित पूरी पुलिस टीम सुंदरवास स्थित उनके घर पहुंची।
1.11 लाख रुपए का मायरा, गाजे-बाजे से हुआ स्वागत
पुलिसकर्मी साफा बांधकर, ढोल-नगाड़ों के साथ मायरे के थाल सजाकर शादी में पहुंचे। उन्होंने मीराबाई के बेटे की शादी में 1.11 लाख रुपए का मायरा भरकर भाई का कर्तव्य निभाया।
थानाधिकारी ने मीराबाई को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। पुलिस टीम के इस भावुक कदम से मीराबाई और उनका परिवार भावुक हो गया। पूरे परिवार ने पुलिसकर्मियों का गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया।
मुश्किलों भरी रही मीराबाई की जिंदगी
मीराबाई की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। शादी के महज एक साल बाद ही उनके पति का एक हादसे में निधन हो गया था। उस समय वह छह महीने की गर्भवती थीं।
पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने थाने में काम करने के साथ-साथ आसपास के घरों में भी कुक का काम करके अपने बेटे की परवरिश की।
नाराज भाइयों ने नहीं निभाया साथ
मीराबाई के तीन भाई हैं, लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते दो भाई शादी में शामिल नहीं हुए। इस वजह से मायरा भी नहीं आया।
जब यह बात थाने की एसआई रेणु खोईवाल को पता चली, तो उन्होंने मीराबाई को भरोसा दिलाया कि वह अकेली नहीं हैं और पुलिस परिवार उनके साथ खड़ा है।
“मां जैसा ख्याल रखती हैं मीरा”
एसआई रेणु खोईवाल ने बताया कि मीराबाई थाने में सभी पुलिसकर्मियों का मां की तरह ख्याल रखती हैं। उनके हाथों के खाने में अपनापन और स्नेह झलकता है।
इसी भावना के चलते पुलिस टीम ने एकजुट होकर मायरा भरने का निर्णय लिया और यह दिखा दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि दिल से भी बनते हैं।