पानी की हर बूंद से संवरेगा मरुप्रदेश: ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के साथ हरित और समृद्ध राजस्थान का संकल्प

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 25 May, 2026 07:01 PM

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राजस्थान में जल संकट और पर्यावरण संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma के नेतृत्व में सोमवार से प्रदेशभर में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” का शुभारंभ किया गया। अभियान का उद्देश्य जल...

जयपुर/उदयपुर। राजस्थान में जल संकट और पर्यावरण संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma के नेतृत्व में सोमवार से प्रदेशभर में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” का शुभारंभ किया गया। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, जल संचय और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति आमजन को जागरूक करना है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

स्वच्छ भारत मिशन राजस्थान सरकार के प्रदेश ब्रांड एंबेसडर K K Gupta ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार लगातार जल संकट से निपटने के लिए योजनाओं और जन अभियानों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रही है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि इसे जन आंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट: जल संकट के समाधान की नई दिशा

के.के. गुप्ता ने मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी “रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना राजस्थान के जल भविष्य के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत विभिन्न नदियों को आपस में जोड़कर जल संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना जल संरक्षण, जल संचय और जल के न्यायसंगत वितरण की सोच पर आधारित है, जो राज्य के विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। उनके अनुसार, “रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट” राजस्थान के जल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।

वाटर हार्वेस्टिंग को जन आंदोलन बनाने की जरूरत

गुप्ता ने कहा कि राजस्थान जैसे जल संकट प्रभावित प्रदेश में वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 300 तालाब प्राकृतिक और कृत्रिम रूप से निर्मित हैं, लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति चिंताजनक है।

उन्होंने तालाबों के पुनर्जीवन के लिए जल आवक मार्गों से अतिक्रमण हटाने, कैचमेंट एरिया तय करने, अवैध निर्माण हटाने, डिसिल्टिंग कराने और नियमित सफाई जैसे कार्यों पर जोर दिया। उनका कहना है कि तालाबों में वर्षा जल संग्रहित होने से पशुओं और खेती के लिए सालभर पानी उपलब्ध रहता है तथा आसपास का भूजल स्तर भी बढ़ता है।

डूंगरपुर मॉडल बना देशभर के लिए उदाहरण

के.के. गुप्ता ने बताया कि नगर परिषद बोर्ड के वर्ष 2015 से 2020 के कार्यकाल में डूंगरपुर में जल संरक्षण और जल संचय के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए गए। शहर की पुरानी बावड़ियों और कुओं की सफाई कर उन्हें गहरा किया गया, जिससे प्रतिदिन करीब 8 लाख लीटर पानी जलदाय विभाग को उपलब्ध कराया जाने लगा।

इसके अलावा शहर की झीलों और तालाबों को गहरा और साफ करवाया गया, जिससे वर्षा जल संग्रहण क्षमता बढ़ी। करीब 100 सरकारी भवनों और 500 घरों को वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से जोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप मात्र एक वर्ष में भूजल स्तर लगभग 20 फीट तक बढ़ गया और पानी का टीडीएस स्तर 840 से घटकर 570 तक पहुंच गया।

उन्होंने बताया कि डूंगरपुर के जल संरक्षण मॉडल को देश के अन्य निकायों ने भी अपनाया। तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने दिल्ली सरकार को डूंगरपुर मॉडल का अध्ययन कर उसे लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद दिल्ली से टीम डूंगरपुर पहुंची और वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया। दिल्ली में हर घर में वाटर हार्वेस्टिंग लागू करने के लिए 50 हजार रुपये तक की सब्सिडी और पानी के बिल में 10 प्रतिशत छूट देने की घोषणा भी की गई थी।

गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियानों से प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को नई दिशा मिल रही है। आने वाले समय में राजस्थान को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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