Edited By Anil Jangid, Updated: 24 Jul, 2026 06:43 PM
प्रदेश के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता ने सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के अधिशाषी अधिकारियों को पत्र जारी कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
जयपुर/ उदयपुर/ डूंगरपुर। प्रदेश में अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। प्रदेश के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता ने सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के अधिशाषी अधिकारियों को पत्र जारी कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए और हर माह की प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार तथा केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक भेजी जाए। 21 जुलाई 2026 को जारी इस पत्र में के.के. गुप्ता ने कहा है कि पृथ्वी और प्राकृतिक संसाधन सभी की साझा धरोहर हैं तथा उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सभी जिलों में 18 बिंदुओं का एक्शन प्लान लागू किया गया है, जिसमें घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर पुराने डंपिंग यार्ड खत्म करने, प्लास्टिक पर रोक और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तक के निर्देश शामिल हैं।
कचरा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी:-
शहरों में बेतरतीब फैले कचरे, पुराने डंपिंग यार्ड और प्लास्टिक प्रदूषण पर अब सख्ती शुरू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में आरएसपीसीबी अधिकारियों के साथ विशेष निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा, जबकि जिला कलेक्टर स्वयं इसकी मासिक समीक्षा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेंगे। राज्य सरकार यह रिपोर्ट हर महीने सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। जिला कलेक्टरों की समीक्षा बैठक के लिए जारी 18 बिंदुओं के एजेंडे में स्पष्ट किया गया है कि अब कचरा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। नगर निकायों को घर-घर से 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण, चार श्रेणियों में कचरे का पृथक्करण, अधिकृत वाहनों से ढके हुए परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू करनी होगी। इसके साथ ही हर माह प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजना भी अनिवार्य किया गया है।
कचरा निस्तारण नहीं किया तो कटेगी बिजली-पानी:-
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) के लिए सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। जिन संस्थानों में प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, 20 हजार वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र है, 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत होती है या 300 से अधिक लोग रहते हैं, उन्हें अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण करना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ पहले नोटिस जारी किया जाएगा। निर्धारित समय में व्यवस्था नहीं करने पर पानी और बिजली का कनेक्शन काटने सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इन प्रावधानों का उद्देश्य बड़े संस्थानों को अपने स्तर पर कचरा प्रबंधन के लिए जवाबदेह बनाना और खुले में कचरा फेंकने व प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाना है।
जवाबदेही होंगी होंगी तय : -
जिला स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) की मजबूत निगरानी व्यवस्था विकसित करने, सभी यूएलबी से फॉर्म-4 की समय पर रिपोर्टिंग, 100 प्रतिशत कचरा उत्पादकों की मैपिंग तथा चार-स्ट्रीम (गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी) कचरा पृथक्करण को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है। निर्देशों के अनुसार अब किसी भी पुराने डंपिंग स्थल पर नया कचरा डालने की अनुमति नहीं होगी। सभी नगर निकायों को पुराने डंपिंग यार्ड का वैज्ञानिक रीमेडिएशन कर उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करनी होगी। साथ ही आकस्मिक निरीक्षण कर फोटो सहित दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर सीधे जवाबदेही तय की जा सके।
खाली भूखंडों की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित मालिक की रहेगी-
शहर में पड़े खाली प्लटो में पड़ी गंदगी के लिए प्लॉट मालिक स्वयं जिम्मेदार होंगे उन्हें अपने प्लॉटों की बाउंड्री वॉल बनाकर स्थान को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी उनकी स्वयं की होगी निकाय स्वच्छ नहीं रखने पर तथा समय अनुसार निर्माण नहीं करने पर करेगी सख्त कार्रवाई
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर सरकार का विशेष फोकस:-
सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले में रिड्यूस-रीयूज-रीसायकल (RRR) सेंटर स्थापित किए जाएंगे और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण इकाइयां विकसित की जाएंगी। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संयुक्त ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार करने पर भी जोर रहेगा। पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि स्वच्छता बनाए रखने के साथ प्रदूषण कम हो और कचरे का अधिकतम पुन: उपयोग एवं पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जा सके।
अवैध कचरा डंपिंग पर जीरो टॉलरेंस, नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई :-
सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अवैध कचरा डंपिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। एजेंडे के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) पर प्रभावी प्रतिबंध लागू कराया जाएगा तथा एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) के तहत संबंधित संस्थानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सड़कों, झीलों, नदी किनारों, पहाड़ियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने या डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। नगर निकायों को जनभागीदारी बढ़ाने, व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कचरा संग्रहण और परिवहन केवल अधिकृत एजेंसियों तथा पंजीकृत वाहनों के माध्यम से ही किया जाएगा। बिना ढके वाहनों से कचरा ढोने या खुले में कचरा डंप करने वाले निकायों और संबंधित एजेंसियों पर भी नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी निकाय के हर अधिकारी की है-
स्वच्छता न केवल इंसान को स्वस्थ रखती है अपीतू लंबी उम्र भी देती है स्वच्छता हर व्यक्ति तथा देवी देवताओं का भी प्रिय है देश की अर्थव्यवस्था में इसका बहुत बड़ा योगदान है देश को विकसित एवं समृद्ध बनाना है तो स्वच्छ बनाना होगा निकायों के समस्त अधिकारी अगर इसे गंभीरता से लें तो राजस्थान स्वच्छ एवं समृद्ध बन सकता है l
हर माह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगी जिले की रिपोर्ट, जवाबदेह होंगे अधिकारी:-
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल सफाई व्यवस्था का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रशासनिक जवाबदेही से सीधे जोड़ा गया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी जिले में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का प्रभावी पालन नहीं होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की मानी जाएगी। प्रत्येक जिले के जिला कलेक्टर को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रगति, नियमों के अनुपालन, कचरा निस्तारण व्यवस्था और सुधारात्मक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट हर माह राज्य सरकार को भेजनी होगी। राज्य सरकार इन रिपोर्टों का संकलन कर नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इससे पूरे राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सतत निगरानी होगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाना है।