डूंगरपुर पुलिस का बच्चों की सुरक्षा पर फोकस, बाल संरक्षण और साइबर सुरक्षा को लेकर बनाई रणनीति

Edited By Ishika Jain, Updated: 27 Jul, 2026 06:27 PM

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डूंगरपुर में 'पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन' कार्यक्रम के तहत पुलिस ने बाल संरक्षण, साइबर सुरक्षा, पॉक्सो मामलों और किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक की। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।

डूंगरपुर। जिले में बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों के संरक्षण और किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को पुलिस लाइन सभागार में 'पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन' कार्यक्रम के तहत विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) और बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल संरक्षण, पॉक्सो मामलों की मॉनिटरिंग, साइबर सुरक्षा, पुनर्वास और स्कूलों में जागरूकता अभियान को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर दिया गया जोर

पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खीवसिंह की मौजूदगी में आयोजित बैठक में जिले के सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, बाल अधिकारिता विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों से जुड़े मामलों में सभी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा।

बाल हितैषी पुलिसिंग और पुनर्वास पर विशेष चर्चा

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खीवसिंह ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशील और बाल हितैषी दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि विशेष किशोर पुलिस इकाई केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास और उनके अधिकारों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने जिले में संचालित 'ऑपरेशन संस्कार' अभियान की जानकारी साझा करते हुए इसके सकारात्मक परिणामों पर भी प्रकाश डाला।

साइबर अपराध और सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान

बैठक में बच्चों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विद्यालय स्तर पर यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा संबंधी अभियान लगातार चलाने की आवश्यकता भी बताई गई।

यूनिसेफ ने साझा किए कानूनी प्रावधान

यूनिसेफ की राज्य स्तरीय बाल संरक्षण सलाहकार सिंधु बिनुजीत ने प्रतिभागियों को पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल अधिकारों और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने उदयपुर रेंज में चलाए जा रहे 'साइबर शील्ड' और 'जीवन रक्षा: एक सुरक्षित सफर की ओर' अभियानों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की अपील की।

पॉक्सो मामलों में समयबद्ध सूचना देने के निर्देश

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष भावेश जैन ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम से जुड़े प्रत्येक मामले की सूचना 24 घंटे के भीतर समिति को उपलब्ध कराना अनिवार्य है। वहीं, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य खातूराम ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक तथा संरक्षणपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है।

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