मिडिल ईस्ट तनाव का असर: टोंक में महंगा हुआ घर बनाना, सरिया-स्टील के दामों में तेज उछाल

Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 10 Apr, 2026 06:10 PM

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों में भी दिखने लगा है। US Israel Iran conflict के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे टोंक में निर्माण सामग्री के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।

वैश्विक तनाव का स्थानीय असर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों में भी दिखने लगा है। US Israel Iran conflict के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे टोंक में निर्माण सामग्री के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।

इसका सीधा असर घर बनाने वाले लोगों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

टीन और लोहे के दामों में उछाल

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार टीन और लोहे के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

  • टाटा टीन: 100 → 105 रुपये प्रति किलो
  • अन्य टीन: 90 → 105 रुपये प्रति किलो

गैस आधारित उत्पादन पर निर्भर कंपनियों में ज्यादा बढ़ोतरी देखी जा रही है।

सरिया हुआ महंगा, निर्माण कार्य प्रभावित

भवन निर्माण में उपयोग होने वाला सरिया (रीबार) भी महंगा हो गया है।

  • पहले: 55 रुपये प्रति किलो
  • अब: 64 रुपये प्रति किलो

इस बढ़ोतरी से मकान बनाने की लागत बढ़ गई है और नए निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ रही है।

प्लास्टिक और टाइल्स उद्योग पर असर

प्लास्टिक उत्पादों में भारी उछाल देखा गया है, क्योंकि कच्चा माल आयात पर निर्भर है।

  • पाइप, टंकी, बाल्टी, ड्रम: 50% तक महंगे
  • टाइल्स और चीनी आइटम: 20% बढ़ोतरी
  • फिटिंग आइटम: 30% तक महंगे

लोहे की सप्लाई में कमी

लोहे के बाजार में सप्लाई घटने से संकट और गहरा गया है।

  • भाव: 54,500 → 60,500 रुपये प्रति टन
  • सप्लाई में 30-40% कमी
  • डिलीवरी समय: 3 दिन से बढ़कर 5-7 दिन

अगर यही स्थिति बनी रही, तो कीमतें 65,000 रुपये प्रति टन पार कर सकती हैं।

बर्तन भी हुए महंगे

धातुओं के बढ़ते दामों का असर बर्तनों पर भी पड़ा है:

  • एल्यूमिनियम: 330 → 445 रुपये/किलो
  • स्टील: 170 → 200 रुपये/किलो
  • पीतल: 900 → 1100 रुपये/किलो
  • तांबा: 1350 → 1800 रुपये/किलो

व्यापार और रोजगार पर संकट

बाजार में तैयार माल की कमी के कारण व्यापार लगभग 15% तक प्रभावित हुआ है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो दुकानों को बंद करना पड़ सकता है और मजदूरों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है।

आमजन पर बढ़ता बोझ

महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है।

  • घर बनाना और मरम्मत महंगी
  • दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी
  • परिवारों का बजट बिगड़ा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो कीमतों में 10–15% और बढ़ोतरी हो सकती है।

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