सीकर का गुहाला गांव बना भाईचारे की मिसाल, हिंदू परिवार ने ईदगाह के लिए दान की बेशकीमती जमीन

Edited By Anil Jangid, Updated: 29 Mar, 2026 06:46 PM

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सीकर: राजस्थान के सीकर जिले के गुहाला गांव ने भाईचारे और एकता की एक शानदार मिसाल पेश की है, जब एक हिंदू परिवार ने अपनी बेशकीमती ज़मीन मुस्लिम समुदाय के लिए दान की। इस पहल से गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण सामने आया है।

सीकर: राजस्थान के सीकर जिले के गुहाला गांव ने भाईचारे और एकता की एक शानदार मिसाल पेश की है, जब एक हिंदू परिवार ने अपनी बेशकीमती ज़मीन मुस्लिम समुदाय के लिए दान की। इस पहल से गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण सामने आया है। गुहाला गांव, जो नीमकाथाना इलाके में स्थित है और अपनी पुरानी हवेलियों और सादगी भरे जीवन के लिए जाना जाता है, अब धार्मिक एकता का प्रतीक बन गया है।

 

गुहाला गांव की एक हिंदू परिवार के पांच भाइयों ने अपनी ज़मीन का एक हिस्सा मुस्लिम समुदाय के लिए ईदगाह बनाने के लिए दान कर दिया। यह कदम गांव में बढ़ती आबादी और ईद के दिन नमाज पढ़ने के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए जरूरी था। पूर्व में, ईदगाह बहुत छोटी पड़ गई थी, और लोग खड़े होने की जगह तक नहीं पा रहे थे।

 

भोपाल राम सैनी और उनके भाईयों ने इस समस्या का समाधान किया और ईदगाह के लिए ज़मीन देने का फैसला किया। पूरणमल सैनी बताते हैं कि न सिर्फ ज़मीन दी, बल्कि ईदगाह की बाउंड्री बनाने में भी उन्होंने खुद हिस्सा लिया। मुस्लिम समुदाय ने उन्हें पैसे देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन भाइयों ने इसे ठुकरा दिया और कहा कि यह आपसी प्यार और भाईचारे का प्रतीक है, इसलिए किसी भी भुगतान की जरूरत नहीं है।

 

कुछ लोगों ने इस कदम का विरोध किया और सवाल उठाए कि मुस्लिम समुदाय को ज़मीन क्यों दी गई। इस पर सैनी परिवार ने साफ कहा कि अगर किसी हिंदू को भी मंदिर के लिए ज़मीन चाहिए, तो उन्हें भी दी जाएगी। उनका मानना है कि सभी धर्मों के लोग बराबरी के अधिकार रखते हैं और उनकी धार्मिक गतिविधियों को पूरी आजादी मिलनी चाहिए।

 

गांव का सामाजिक ढांचा भी इस पहल को खास बनाता है, क्योंकि यहां छत्तीस कौम के लोग रहते हैं, जिसमें 25% मुस्लिम, 25% अनुसूचित जाति और 25% सैनी समुदाय के लोग शामिल हैं। बाकी अन्य समुदाय भी मिल-जुलकर रहते हैं। इस कदम ने गांव में एकता और सामुदायिक सौहार्द का आदान-प्रदान किया है।

 

अब, ईदगाह के नाम पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी पूरी हो रही है, और यह कदम सीकर जिले के अन्य गांवों और समुदायों के लिए एक प्रेरणा बन गया है।

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