पाली की सरस्वती ने दो साल पढ़ाई छोड़ी, फिर 78% लाकर जिले में बनीं सेकंड टॉपर

Edited By Anil Jangid, Updated: 13 Apr, 2026 07:29 PM

saraswati from pali scored 78 to become district second topper

पाली: पाली जिले की 19 वर्षीय सरस्वती ने यह साबित कर दिया कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से आने वाली सरस्वती ने 10वीं कक्षा में 78% अंक प्राप्त कर जिले में द्वितीय स्थान हासिल किया...

पाली: पाली जिले की 19 वर्षीय सरस्वती ने यह साबित कर दिया कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से आने वाली सरस्वती ने 10वीं कक्षा में 78% अंक प्राप्त कर जिले में द्वितीय स्थान हासिल किया है। उनकी यह सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जिले और खासकर ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

 

सरस्वती का परिवार खेती-पशुपालन पर निर्भर है और वह एक 25 सदस्यीय संयुक्त परिवार में रहती हैं। सरस्वती ने अपनी शिक्षा की शुरुआत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से की थी, लेकिन कुछ व्यक्तिगत कारणों की वजह से उन्हें 2022 में मात्र 15 वर्ष की उम्र में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

 

हालांकि, सरस्वती की शिक्षा के प्रति लगन ने उन्हें हार मानने नहीं दिया। दो साल बाद, 'एजुकेट गर्ल्स' संस्था के प्रगति कैंप ने उन्हें फिर से पढ़ाई का मौका दिया। प्रेरक दीदी धनकी देवी ने उनके माता-पिता को समझाकर सरस्वती को फिर से पढ़ाई के लिए तैयार किया।

 

वर्ष 2024 में सरस्वती ने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में नामांकन कराया और अपने घरेलू कामों और खेती के बीच, रोजाना तीन घंटे प्रगति कैंप में पढ़ाई करने लगीं। उनके अथक प्रयासों और समर्पण का परिणाम यह हुआ कि उन्होंने 78% अंक प्राप्त किए और जिले में सेकंड टॉपर बन गईं।

 

इस शानदार उपलब्धि पर सरस्वती को 'मीरा पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, 'एजुकेट गर्ल्स' संस्था ने उन्हें मुंबई में आयोजित अपने 18वें स्थापना दिवस समारोह में आमंत्रित किया था, लेकिन पारिवारिक कारणों से वह इस अवसर पर उपस्थित नहीं हो पाई। हालांकि, पाली में आयोजित दीक्षांत समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया।

 

अब सरस्वती ने कक्षा 12वीं में नामांकन करा लिया है और उनका सपना है कि वह शिक्षिका बनकर सरकारी नौकरी प्राप्त करें। उनकी सफलता ने न केवल उनके गांव की लड़कियों को प्रेरित किया है, बल्कि यह साबित किया है कि किसी भी परिस्थिति में अगर आत्मविश्वास और मेहनत हो, तो हर सपना पूरा किया जा सकता है।

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