Edited By Anil Jangid, Updated: 06 Jun, 2026 05:20 PM

पाली: राजस्थान के पाली जिले की साध्वी भगवती बाईजी ने वह कर दिखाया जो सुनने में लगभग नामुमकिन लगता है। खुद कभी स्कूल की दहलीज तक न पहुंच पाने वाली भगवती बाईजी आज 1300 से अधिक बेटियों के भविष्य को संवार रही हैं।
पाली: राजस्थान के पाली जिले की साध्वी भगवती बाईजी ने वह कर दिखाया जो सुनने में लगभग नामुमकिन लगता है। खुद कभी स्कूल की दहलीज तक न पहुंच पाने वाली भगवती बाईजी आज 1300 से अधिक बेटियों के भविष्य को संवार रही हैं।
भगवती बाईजी ने 164 छात्राओं के साथ अपने कन्या गुरुकुल की शुरुआत की थी। समय के साथ यह गुरुकुल शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता का बड़ा केंद्र बन गया। यहां छात्राओं को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन की मूल्यवान सीख, नैतिकता और आत्मनिर्भर बनने की शिक्षा दी जाती है।
भगवती बाईजी का मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि सही संस्कार और आत्मविश्वास बच्चों के जीवन को दिशा देते हैं। उन्होंने कहा, “जब गुरु की सीख मिली, तो समझ आया कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है। यही सोच मुझे बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण की राह पर लेकर आई।”
उनका यह प्रयास पाली जिले और आसपास के क्षेत्रों में बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। कन्या गुरुकुल में पढ़ाई के साथ-साथ छात्राओं को कला, हस्तशिल्प, योग और सामाजिक जिम्मेदारी की ट्रेनिंग भी दी जाती है। इससे छात्राएं न केवल शिक्षित बनती हैं, बल्कि आत्मनिर्भर और समाज में योगदान देने वाली नागरिक भी बनती हैं।
भगवती बाईजी की कहानी यह दिखाती है कि अगर इच्छाशक्ति और समर्पण हो, तो जीवन में कोई भी बाधा किसी की राह नहीं रोक सकती। उनकी मेहनत और गुरु की दी गई सीख ने उन्हें हजारों बेटियों की ‘दाताश्री’ बना दिया।
आज 1300 से अधिक छात्राओं का भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन चुका है। उनके प्रयासों से न केवल पाली जिले में, बल्कि पूरे राजस्थान में शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण का संदेश फैल रहा है। भगवती बाईजी का यह सफर बताता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए शिक्षा और संस्कार की शक्ति असीम है।