राजस्थान विधानसभा मानसून सत्र: पहले दिन 21 मिनट में सदन स्थगित, हंगामे और प्रदर्शन के बीच विपक्ष ने सरकार को घेरा

Edited By Anil Jangid, Updated: 20 Aug, 2026 03:51 PM

rajasthan assembly monsoon session house adjourned in just 21 minutes

जयपुर। राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को हंगामे और विपक्षी प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही महज 21 मिनट चली।

जयपुर। राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को हंगामे और विपक्षी प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही महज 21 मिनट चली। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही सुबह शुरू होने के कुछ ही देर बाद विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके चलते करीब 11:22 बजे कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

 

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में मीडिया की एंट्री से जुड़े फैसलों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला। विधानसभा पहुंचने पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर विधायकों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कुछ विधायक बैरिकेड्स पर चढ़ते नजर आए।

 

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट और टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के कई नेता विधानसभा के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। डोटासरा ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को विधानसभा में प्रवेश से रोका जा रहा है और गेट नंबर छह पर ताले लगाए गए हैं।

 

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग भी उठाई। डोटासरा ने प्रदेश के करीब तीन हजार स्कूलों में शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। कांग्रेस ने इन मुद्दों को विधानसभा के आगामी दिनों में भी प्रमुखता से उठाने के संकेत दिए हैं।

 

वहीं, भारत आदिवासी पार्टी यानी BAP के विधायकों ने भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। BAP की ओर से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग उठाई गई। इससे विधानसभा सत्र के पहले दिन ही अलग-अलग मुद्दों पर विपक्षी दलों की सक्रियता साफ दिखाई दी।

 

इस बीच विधानसभा के मानसून सत्र में द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026 भी चर्चा का प्रमुख विषय बनने जा रहा है। प्रस्तावित विधेयक में 29 प्रजातियों के पेड़ों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखने का प्रावधान बताया गया है। इनमें बबूल और शीशम जैसी लकड़ी की प्रजातियां भी शामिल हैं, जिनका राजस्थान के फर्नीचर और हस्तशिल्प उद्योग में व्यापक इस्तेमाल होता है।

 

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार प्रतिबंधित श्रेणी के पेड़ों को बिना अनुमति काटने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है। हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े कारोबारियों और निर्यातकों ने इसको लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बबूल और शीशम को प्रतिबंधित सूची में रखने से फर्नीचर, हस्तशिल्प और सजावटी उत्पादों के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

 

राजस्थान हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स जॉइंट फोरम की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बबूल और शीशम को प्रतिबंधित सूची से बाहर रखने की मांग की गई है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार हस्तशिल्प निर्यात से प्रदेश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है और लाखों कारीगरों की आजीविका इससे जुड़ी है।

 

मानसून सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल और बीजेपी विधायक दल की अलग-अलग बैठकें भी हुईं। विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है, जबकि सत्तापक्ष भी विपक्ष के हमलों का जवाब देने की तैयारी में है।

 

सत्र के दौरान ट्रीज बिल के अलावा यूसीसी और एक निजी विश्वविद्यालय से संबंधित विधेयक भी सदन में रखे जाने की संभावना है। जीएसटी संशोधन विधेयक को लेकर फिलहाल राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार बताया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ विधेयकों को लेकर भी तीखी बहस के आसार हैं।

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