Edited By Anil Jangid, Updated: 08 Mar, 2026 01:42 PM

जोधपुर। ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध का असर अब दुनियाभर के देशों पर पड़ने लगा है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक हवाई यातायात और तेल, गैस जैसे उद्योगों पर गंभीर असर पड़ा है, और अब छोटे उद्योग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट उद्योग...
जोधपुर। ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध का असर अब दुनियाभर के देशों पर पड़ने लगा है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक हवाई यातायात और तेल, गैस जैसे उद्योगों पर गंभीर असर पड़ा है, और अब छोटे उद्योग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को इस वैश्विक संकट का बड़ा झटका लगा है। दरअसल, नई दिल्ली में 11 से 14 मार्च तक आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित आईएमएम इंडिया फर्नीचर फेयर को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस मेले में राजस्थान के कई हैंडीक्राफ्ट कारोबारी शामिल होने वाले थे, जिनकी उम्मीद थी कि वे अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करेंगे।
इस मेले का आयोजन जर्मनी की एक संस्था द्वारा किया जाना था, जिसमें जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की भी भागीदारी थी। जोधपुर के करीब 70 से 100 निर्यातक अपनी लकड़ी के फर्नीचर, सजावटी वस्तुएं, और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन करने वाले थे। कार्यक्रम में यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों से बड़े पैमाने पर खरीदारों के आने की उम्मीद थी, लेकिन मध्य-पूर्व के हवाई मार्गों के प्रभावित होने और सैन्य तनाव के कारण यह मेले का आयोजन स्थगित कर दिया गया है।
जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने कहा कि वैश्विक राजनीतिक तनाव के चलते मेले का स्थगित होना एक स्वाभाविक निर्णय था। उन्होंने बताया कि मध्य-पूर्व के हवाई मार्गों में अनिश्चितता और यात्रा रद्द करने के कारण यह फैसला लिया गया। ऐसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने से निर्यातकों को नए बाजार और बड़े ऑर्डर मिलते हैं, लेकिन अब इस स्थगन से उद्योग को अस्थायी झटका लगा है।
जोधपुर, जो भारत के प्रमुख हैंडीक्राफ्ट निर्यात केंद्रों में से एक है, अब इस वैश्विक संकट का सामना कर रहा है। यहां तैयार होने वाला लकड़ी का फर्नीचर और हस्तशिल्प उत्पाद यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में निर्यात होते हैं। अब जब ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेल स्थगित हो रहे हैं, तो निर्यातकों के लिए चिंता बढ़ गई है। पहले ही एलपीजी गैस की आपूर्ति और लागत में वृद्धि जैसी समस्याएं उद्योग को प्रभावित कर रही थीं। अब वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण व्यापारिक गतिविधियों में आई रुकावट से कारोबार पर और असर पड़ सकता है।