Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Mar, 2026 07:27 PM

कोटा: विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर कोटा रेल मंडल में टीबी (क्षय रोग) के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत मंडल रेल चिकित्सालय के बहिरंग विभाग (ओपीडी) में आयोजित...
कोटा: विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर कोटा रेल मंडल में टीबी (क्षय रोग) के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत मंडल रेल चिकित्सालय के बहिरंग विभाग (ओपीडी) में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी, चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हुए।
यह कार्यशाला मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपूर्णा सेन रोय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों और आमजन को टीबी के शुरुआती लक्षणों, बचाव और उपचार के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. ब्रजमोहन ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के माध्यम से फैलती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को तीन सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना या बिना किसी कारण के वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि बलगम में खून आना, अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना भी टीबी के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। डॉ. ब्रजमोहन ने जोर देकर कहा कि समय पर पहचान और नियमित दवा लेने से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने इस पहल को रेलवे की जन-जागरूकता मुहिम का हिस्सा बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से आम लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई जा रही है। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी को जरूरी बताया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने सरकारी स्तर पर उपलब्ध निःशुल्क जांच और उपचार सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही मरीजों के लिए पोषण सहायता योजनाओं की जानकारी साझा की गई, ताकि इलाज के दौरान उन्हें उचित सहयोग मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुषमा भटनागर ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर इलाज कराकर न केवल अपनी बल्कि दूसरों की भी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
यह कार्यशाला टीबी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और समाज को इस गंभीर बीमारी से मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।