Edited By Anil Jangid, Updated: 05 May, 2026 03:09 PM

कोटा: राजस्थान के कोटा जिले में लाडपुरा ब्लॉक के ग्राम अरण्डखेड़ा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार का मामला सामने आया है। स्थानीय छात्रों और उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रशासन ने बच्चों को तिलक...
कोटा: राजस्थान के कोटा जिले में लाडपुरा ब्लॉक के ग्राम अरण्डखेड़ा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार का मामला सामने आया है। स्थानीय छात्रों और उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रशासन ने बच्चों को तिलक लगाकर आने पर रोका और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस घटना से अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी फैल गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई छात्र-छात्राओं ने शिकायत की है कि विद्यालय में उन्हें अपमानजनक शब्दों से बुलाया जाता है और अनुचित व्यवहार किया जाता है। बच्चों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे धार्मिक प्रतीक, जैसे तिलक, लगाकर विद्यालय में न आएं। अभिभावकों का कहना है कि यह किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास और उनके संस्कारों का सम्मान करना होना चाहिए।
इस घटना ने क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मामले की त्वरित जांच की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
इससे पहले कोटा जिले में सुरक्षा और आधारभूत ढांचे को लेकर भी कई समस्याएं सामने आ चुकी हैं। कैथून-सांगोद मार्ग पर एक अनियंत्रित ट्रक ने बिजली के तीन खंभों को टक्कर मार दी। इस दौरान ड्यूटी से घर लौट रहे डॉ. मनीष नामा की कार पर खंभा गिर गया, जिससे वे मामूली रूप से घायल हो गए। हादसे के कारण मार्ग पर लंबा जाम लग गया।
व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुनील जैन ने बिजली विभाग पर जर्जर खंभों की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे हालात नागरिकों और छात्रों के लिए खतरा पैदा करते हैं। दोनों घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए हैं।
कोटा के ग्रामीण और अभिभावक यह मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में बच्चों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए, साथ ही सड़क और विद्युत सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। इससे बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ समुदाय में विश्वास भी बढ़ेगा।