Edited By Afjal Khan, Updated: 13 Feb, 2026 05:43 PM

राजस्थान में फसल बीमा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का बीमा किया गया, जिनके पास कृषि भूमि ही नहीं है। मंत्री के अनुसार, लगभग 15 हजार संदिग्ध नामों पर...
राजस्थान में फसल बीमा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का बीमा किया गया, जिनके पास कृषि भूमि ही नहीं है। मंत्री के अनुसार, लगभग 15 हजार संदिग्ध नामों पर बीमा प्रीमियम काटा गया और करीब 1150 करोड़ रुपये का क्लेम भी स्वीकृत कर दिया गया।
यह बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारकों के माध्यम से किया गया था।
सालासर की SBI शाखा में 71 मामलों पर आपत्ति
दरअसल मंत्री किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को चूरू जिले के सालासर स्थित State Bank of India शाखा पहुंचे। यहां उन्होंने 71 ऐसे खातों का उल्लेख किया, जिनमें फसल बीमा प्रीमियम काटा गया, जबकि संबंधित व्यक्तियों के पास भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। मंत्री ने इस दौरान कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सूची में शामिल कई नामों का न तो जमाबंदी रिकॉर्ड है और न ही खसरा नंबर दर्ज है। इन पॉलिसियों को Agriculture Insurance Company of India (AIC) द्वारा कवर किया गया बताया गया है।
प्रति व्यक्ति 12 लाख तक का प्रस्तावित भुगतान
बताया गया कि इन 71 मामलों में प्रत्येक नाम पर लगभग 12 लाख रुपये तक का भुगतान प्रस्तावित था, जिससे कुल राशि करीब 9 करोड़ रुपये बैठती है। मंत्री का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी थी। उन्होंने शाखा प्रबंधक से संबंधित दस्तावेज और पूरी बीमा सूची उपलब्ध कराने की मांग की। मंत्री के अनुसार, जब तक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाएंगे, वे मामले को छोड़ने वाले नहीं हैं।
बैंक प्रबंधन ने मांगा समय
शाखा प्रबंधक ने तत्काल दस्तावेज उपलब्ध न होने की बात कही और आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने के लिए एक-दो दिन का समय मांगा। हालांकि, उन्होंने मीडिया के समक्ष विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
मंत्री के दावों के बाद अब निगाहें संभावित जांच प्रक्रिया पर टिक गई हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला फसल बीमा प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक जांच और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।