नागौर में बिजली वाली गाड़ी का पॉल्यूशन चालान, काले शीशे को लेकर पुलिस और ड्राइवर के बीच बहस

Edited By Anil Jangid, Updated: 09 Apr, 2026 03:49 PM

ev car pollution fine in nagaur heated argument between driver police

नागौर: नागौर जिले में एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV कार) को लेकर पुलिस और ड्राइवर के बीच एक विवाद हो गया। पुलिस ने इलेक्ट्रिक वाहन का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) काट दिया और साथ ही कार पर लगे काले शीशों (टिंटेड ग्लास) के लिए भी चालान कर दिया।

नागौर: नागौर जिले में एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV कार) को लेकर पुलिस और ड्राइवर के बीच एक विवाद हो गया। पुलिस ने इलेक्ट्रिक वाहन का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) काट दिया और साथ ही कार पर लगे काले शीशों (टिंटेड ग्लास) के लिए भी चालान कर दिया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें कार चालक और पुलिसकर्मी के बीच तीखी बहस देखी जा सकती है। हालांकि, राजस्थान पुलिस ने अभी तक इस वीडियो की पुष्टि नहीं की है।

क्या हुआ था नागौर में?
यह घटना उस वक्त हुई जब पुलिस ने इलेक्ट्रिक वाहन का PUC काटा, साथ ही कार में लगे काले शीशों के लिए चालान भी किया। कार चालक ने इस दौरान पुलिस से बहस करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) होने के कारण PUC की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पुलिस ने अपना कार्य जारी रखा और चालान जारी कर दिया। चालक ने पूरी बहस का वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिससे यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर चर्चा
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोग EV चालक का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ पुलिस की कार्रवाई को सही मानते हुए नियमों का पालन करने की बात कर रहे हैं। यह वीडियो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए PUC अनिवार्य होना चाहिए या नहीं और पुलिस को EV नियमों की जानकारी किस हद तक होनी चाहिए।

अंत में कुछ सवाल
क्या EV वाहनों का PUC अनिवार्य होना चाहिए?
क्या पुलिस EV वाहन के नियमों के बिना PUC काट सकती है?
ब्लैक शीशे पर सख्ती जरूरी है, लेकिन क्या EV मालिकों को परेशान करना सही है?
क्या राजस्थान पुलिस को EV नियमों पर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए?

क्या है PUC?
PUC (Pollution Under Control) प्रमाण-पत्र यह साबित करता है कि वाहन से निकलने वाले प्रदूषण (एमिशन) निर्धारित सीमा के अंदर हैं। यह प्रमाण-पत्र पेट्रोल, डीजल, और सीएनजी वाहनों के लिए अनिवार्य है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह आमतौर पर आवश्यक नहीं होता, क्योंकि वे कोई प्रदूषण नहीं फैलाते।

ब्लैक शीशे (टिंटेड ग्लास) का कानून
सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले के अनुसार, कार पर ब्लैक फिल्म या कोई भी अतिरिक्त टिंट लगाना अवैध है। विंडशील्ड (आगे-पीछे) का कम से कम 70% लाइट पास होना चाहिए, और साइड विंडो का 50% लाइट पास होना चाहिए।

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