नागौर जिला क्रिकेट संघ RCA से निष्कासित, वित्तीय अनियमितताओं और ऑडिट विवाद के आरोप

Edited By Anil Jangid, Updated: 06 Jun, 2026 05:15 PM

nagaur district cricket association suspended by rca

जयपुर: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) ने नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) को गंभीर वित्तीय और संवैधानिक अनियमितताओं के आरोपों के चलते अपनी सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। RCA की जनरल बॉडी ने 15 मई 2026 को पारित प्रस्ताव के आधार...

नागौर: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) ने नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) को गंभीर वित्तीय और संवैधानिक अनियमितताओं के आरोपों के चलते अपनी सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। RCA की जनरल बॉडी ने 15 मई 2026 को पारित प्रस्ताव के आधार पर यह कार्रवाई की।

 

RCA की एडहॉक कमेटी के कन्वीनर मोहित यादव ने बताया कि नागौर DCA के रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई वित्तीय विसंगतियां और अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद RCA ने 12 अप्रैल और 12 मई 2026 को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज, स्पष्टीकरण और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

 

हालांकि, DCA नागौर बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद आवश्यक वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट दस्तावेज, क्रिकेट गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड, सदस्यता विवरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा। स्वतंत्र ऑडिट समीक्षा में यह भी पाया गया कि प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्टों में वैध यूडीआईएन (Unique Document Identification Number) का उल्लेख नहीं था। साथ ही DCA द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ रिकॉर्ड RCA कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठे।

 

RCA की एड-हॉक कमेटी ने 23 अप्रैल 2026 को मामले को जनरल बॉडी के समक्ष निष्कासन की सिफारिश के साथ रखा। इसके बाद 15 मई 2026 को जनरल बॉडी ने प्रस्ताव पारित कर नागौर DCA को RCA संविधान के अनुच्छेद-31 के तहत सदस्यता से निष्कासित कर दिया। RCA ने स्पष्ट किया कि यह निष्कासन 15 मई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इस निर्णय की प्रतिलिपि रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, राजस्थान राज्य खेल परिषद, नागौर के उप-पंजीयक सहकारी समितियां तथा जिला खेल अधिकारी को भेजी गई है।

 

मामले के बाद तत्कालीन नागौर DCA के सचिव आरएस नांदु ने कहा कि यह लड़ाई अब न्यायालय तक जाएगी। उन्होंने कहा, “अब क्रिकेट के झगड़ों से ऊब गया हूं। हक की लड़ाई न्यायालय में लड़ता रहूंगा। आरसीए को नेताओं के चंगुल से बाहर निकालना मेरा उद्देश्य है। आखिरी सांस तक मेरी लड़ाई धनंजय सिंह खींवसर से है।”

 

यह मामला राजस्थान क्रिकेट में प्रशासनिक पारदर्शिता और ऑडिट अनुपालन की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, और इसके प्रभाव का खेल समुदाय पर गहरा असर पड़ सकता है।

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