Edited By Ishika Jain, Updated: 01 Apr, 2026 06:32 PM

राजस्थान के डूंगरपुर में आशा सहयोगिनी और साथिनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर ‘काला दिवस’ मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
राजस्थान के डूंगरपुर में आशा सहयोगिनी और साथिनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर ‘काला दिवस’ मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
सीटू के आह्वान पर हुआ प्रदर्शन
यह प्रदर्शन राजस्थान आशा सहयोगिनी एवं साथिन यूनियन (सीटू) के आह्वान पर आयोजित किया गया, जिसमें जिलेभर की आशा सहयोगिनियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के हालिया बजट को लेकर नाराजगी जताई।
मानदेय में देरी से बढ़ी परेशानी
आशा सहयोगिनियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार काम का दबाव बढ़ाया जा रहा है, लेकिन इसके मुकाबले उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पीसीटीएस का पैसा और मानदेय 3-4 महीने तक अटका रहता है, जिससे आर्थिक संकट पैदा हो रहा है।
संसाधनों की कमी से काम प्रभावित
कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि ऑनलाइन कार्य अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन उन्हें अब तक एंड्रॉइड मोबाइल उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे उन्हें काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थायीकरण और न्यूनतम वेतन की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि सभी आशा सहयोगिनियों को स्थायी कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक यह संभव नहीं होता, तब तक उन्हें कम से कम 26,000 रुपए प्रतिमाह वेतन देने की मांग की गई है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे पूरे राजस्थान में उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगी।