दौसा में कॉन्स्टेबल हत्याकांड: दो आरोपियों को उम्रकैद, तीन को 5 साल की सजा

Edited By Ishika Jain, Updated: 01 May, 2026 05:00 PM

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राजस्थान के दौसा में चर्चित कॉन्स्टेबल हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, घटना के बाद फरार होने में मदद करने वाले तीन अन्य...

राजस्थान के दौसा में चर्चित कॉन्स्टेबल हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, घटना के बाद फरार होने में मदद करने वाले तीन अन्य आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा दी गई है।

कोर्ट का फैसला और सुनवाई

जिला एवं सत्र न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया। विशेष लोक अभियोजक गोपाल शर्मा के अनुसार, अदालत में 56 गवाहों के बयान और 200 से अधिक दस्तावेज पेश किए गए। करीब 218 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने सौरभ और नवीन को हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना, जबकि बंटी, जीतू और शुभम को सहयोगी अपराधी माना गया।

कैसे हुई वारदात

यह मामला अगस्त 2023 का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि दो बदमाश चोरी की बाइक पर अवैध हथियारों के साथ हाईवे से गुजर रहे हैं। इस पर डीएसटी टीम के कॉन्स्टेबल प्रहलाद सिंह और उनके साथियों ने पीछा किया।

पुलिस का दबाव बढ़ता देख आरोपी बाइक छोड़कर खेतों की ओर भाग गए। पीछा करते हुए पुलिस भी खेतों में पहुंची, जहां आरोपियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इसी दौरान चली गोली सीधे कॉन्स्टेबल प्रहलाद सिंह के सिर में लगी।

इलाज के दौरान मौत

गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन करीब एक सप्ताह बाद उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

36 घंटे तक खेतों में छिपे रहे आरोपी

वारदात के बाद दोनों मुख्य आरोपी करीब 36 घंटे तक खेतों में छिपे रहे। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। बाद में जब एक आरोपी ने अपने साथियों से संपर्क किया, तो लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

शहीद कॉन्स्टेबल का परिचय

प्रहलाद सिंह दौसा के सदर थाने में तैनात थे और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) का हिस्सा थे। उनका जन्म 10 जुलाई 1989 को हुआ था और वे 2008 में पुलिस सेवा में शामिल हुए थे।

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