Edited By Anil Jangid, Updated: 27 Jul, 2026 03:34 PM

जयपुर: समुद्र किनारे उगने वाले मैंग्रोव पेड़ सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ाते, बल्कि तूफान, तेज लहरों और तटीय कटाव से भी सुरक्षा देते हैं। इन्हें बचाने और बढ़ाने की दिशा में ओडिशा में पिछले तीन साल से मैंग्रोव संरक्षण अभियान चल रहा है। अब यह पहल को गोवा...
जयपुर: समुद्र किनारे उगने वाले मैंग्रोव पेड़ सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ाते, बल्कि तूफान, तेज लहरों और तटीय कटाव से भी सुरक्षा देते हैं। इन्हें बचाने और बढ़ाने की दिशा में ओडिशा में पिछले तीन साल से मैंग्रोव संरक्षण अभियान चल रहा है। अब यह पहल को गोवा तक भी जाने वाली है।
इस पहल के तहत पिछले तीन साल में ओडिशा के अस्तरंगा इलाके में 62 एकड़ से ज्यादा खराब हो चुकी तटीय जमीन को फिर से विकसित किया गया। इसके साथ ही, पाँच गाँवों में 30 हजार से ज्यादा मैंग्रोव पौधे लगाए गए। इस पहल से पर्यावरण को फायदा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बने हैं।
लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए। फैशन, म्यूजिक और डिजिटल गेम जैसे माध्यमों से खासकर युवाओं को यह समझाने की कोशिश की गई कि मैंग्रोव हमारे लिए क्यों जरूरी हैं। विश्व मैंग्रोव दिवस पर एक इंटरैक्टिव डिजिटल गेम भी शुरू किया गया है, जिससे लोग खेल-खेल में मैंग्रोव का महत्व समझ सकें।
इस मुहिम को लेकर कहा गया है कि किसी भी अच्छे काम का असर तभी बढ़ता है, जब लोग उससे जुड़ें और उसकी अहमियत समझें। इसलिए मैंग्रोव लगाने के साथ ही लोगों में इसके प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है। ओडिशा में मिली सफलता के बाद अब इस अभियान को गोवा तक बढ़ाने की योजना है, ताकि देश के और तटीय इलाकों में भी मैंग्रोव संरक्षण को मजबूती मिल सके।