बाड़मेर में 55 फीट ऊंची पंचधातु भगवान महावीर प्रतिमा, 155 फीट ऊंचा बनेगा भव्य जैन तीर्थ

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 13 Feb, 2026 07:00 PM

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राजस्थान के बाड़मेर के कुशल वाटिका क्षेत्र में जैन धर्म का एक भव्य और आधुनिक तीर्थ आकार ले रहा है। यहां भगवान महावीर की 55 फीट ऊंची पंचधातु से निर्मित बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की जा रही है, जिसे विश्व की सबसे बड़ी बैठी हुई पंचधातु प्रतिमा बताया जा...

बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर के कुशल वाटिका क्षेत्र में जैन धर्म का एक भव्य और आधुनिक तीर्थ आकार ले रहा है। यहां भगवान महावीर की 55 फीट ऊंची पंचधातु से निर्मित बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की जा रही है, जिसे विश्व की सबसे बड़ी बैठी हुई पंचधातु प्रतिमा बताया जा रहा है।

यह प्रतिमा समवसरण के ऊपर स्थापित की जाएगी और पूरे परिसर की कुल ऊंचाई जमीन से करीब 155 फीट तक पहुंचेगी।

 25 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा प्रोजेक्ट

करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट में धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा और संस्कृति को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है।

मंदिर परिसर में जमीन से लगभग 100 फीट ऊंचा तीन मंजिला मंदिर बनाया जा रहा है। ग्राउंड फ्लोर सहित तीनों मंजिलों को धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

 जैन शास्त्रों पर आधारित संग्रहालय

दूसरी और तीसरी मंजिल पर जैन शास्त्रों पर आधारित संग्रहालय का निर्माण होगा। यहां जैन धर्म के इतिहास, दर्शन, प्रमुख तीर्थ स्थलों और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाएगी।

मंदिर परिसर में गोला आकार के तीन गढ़ बनाए गए हैं, जो इसकी संरचना को भव्यता प्रदान करते हैं। पहली मंजिल पर सम्मेद शिखर और गिरनार शिखर की रचनाएं तैयार की जाएंगी, साथ ही जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों और धार्मिक प्रतीकों की कलात्मक आकृतियां स्थापित की जाएंगी।

 नासिक के आर्किटेक्ट अनिल बी. चौरड़िया का डिजाइन

इस पूरे प्रोजेक्ट का डिजाइन नासिक के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट अनिल बी. चौरड़िया द्वारा तैयार किया गया है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जैन वास्तुकला के समन्वय से यह तीर्थ विकसित किया जा रहा है।

 प्रतिमा निर्माण कार्य शुरू

भगवान महावीर की 55 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। वर्तमान में प्रतिमा का प्रारंभिक ढांचा तैयार है और बैठने के स्थल का निर्माण जारी है। निर्माण पूर्ण होने के बाद यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।

 पहले से मौजूद हैं प्रमुख मंदिर

कुशल वाटिका में पहले से ही नवग्रह मंदिर और दादा गुरुदेव मंदिर स्थित हैं, जो जैन समाज में प्रसिद्ध हैं। यहां गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु सालभर दर्शन के लिए आते हैं।

नए मंदिर, संग्रहालय, वाचनालय, जिनालय और दादाबाड़ी के निर्माण के बाद बाड़मेर जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल हो जाएगा।

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