Edited By Afjal Khan, Updated: 04 Feb, 2026 07:14 PM

राजस्थान की राजनीति इन दिनों विकास के नहीं,बल्कि विकास निधि यानी MLA/MP फंड के इस्तेमाल को लेकर चर्चाओं में है। फर्क बस इतना है कि कहीं सड़क-नाली बननी थी और कहीं फाइलें, फर्में और फर्जी बिल बन गए। राजतक्षण में इन दिनों कमीशनखोरी, रिश्वत और...
राजस्थान की राजनीति इन दिनों विकास के नहीं,बल्कि विकास निधि यानी MLA/MP फंड के इस्तेमाल को लेकर चर्चाओं में है। फर्क बस इतना है कि कहीं सड़क-नाली बननी थी और कहीं फाइलें, फर्में और फर्जी बिल बन गए। राजतक्षण में इन दिनों कमीशनखोरी, रिश्वत और भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे मामले सामने आ रहे है, जिनसे अब अपने प्रतिनिधि को लेकर आम जनता का भरोसा डगमगाने लगा है। पहले जयकृष्ण पटेल, फिर रेवंत राम डांगा, अनीता जाटव, ऋतू बनावत और अब ताजा मामला बलजीत यादव का। खींवसर से बीजेपी विधायक रेवत राम डांगा, कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और निर्दलीय विधायक ऋतू बनावत पर विधायक निधि में कमीशन लेने के आरोप है। इस प्रकरण की जांच के लिए गठित सदाचार कमेटी की कार्रवाई जारी है। उधर भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी से विधायक जयकृष्ण पटेल पर भी रिश्वत मांगने के आरोप लगे है और उनपर भी कार्रवाई अभी जारी है। ये मामला अभी तक सुलझा भी नहीं था कि बीते दिन ईड ने ईमानदारी की दुहाई देने वाले बलजीत ज्यादा को गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि बलजीत यादव पर यह कार्रवाई एमएलए लोकल एरिया डेवलपमेंट यानी LAD फंड के दुरुपयोग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जयपुर क्षेत्रीय इकाई की ओर से की गई। ईडी ने मंगलवार रात अलवर के शाहजहांपुर टोल प्लाजा से मंगलवार रात पूर्व विधायक बलजीत यादव को हिरासत में लिया। इसके बाद पूछताछ के लिए जयपुर स्थित ईडी ऑफिस लाया गया। यहां पूछताछ के बाद बलजीत यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। पूर्व विधायक बलजीत यादव पर MLA Fund से 3 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के दुरुपयोग और गबन का आरोप है। ईडी सूत्रों के मुताबिक- जनवरी-2025 में पूर्व विधायक बलजीत के जयपुर में 8 और दौसा-बहरोड़ में एक-एक ठिकाने पर तलाशी ली गई थी। सर्च के दौरान इंपॉर्टेंट डॉक्यूमेंट और आपत्तिजनक सबूत ईडी के हाथ लगे थे। इन्हीं सबूतों के आधार पर पूर्व विधायक बलजीत यादव को अरेस्ट किया गया है। ऐसे में चलिए आपको बताते है कि Mp,mla led fund के नियम क्या क्या है। साथ ही ये भी जानेगे कि कितना बजट होता है और इसका उपयोग कैसे होता है।
तो चलिए सबसे पहले बात कि आखिर MLA LAD Fund होता क्या है।
देखिए सरकार की तरफ से हर विधायक को पैसा दिया जाता है, जिससे संबंधित विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य करवाए जा सके। सड़क बने, स्कूल सुधरे, पानी, बिजली, अस्पताल जैसे काम हों, मगर शर्त यह कि पैसा जनता पर खर्च हो, जेब पर नहीं। हर विधायक को प्रति वर्ष लगभग ₹5 करोड़ रूपए मिलते है। विधायक कार्यकाल पांच साल का होता है। ठीक ऐसे ही सांसदों के लिए भी नियम तय होते है। इतना पैसा कि उस क्षेत्र का विकास अच्छे से करवाया जाए तो पूरी सूरत ही बदली जा सकती है।
अब सवाल ये है कि पैसा खर्च कैसे होना चाहिए?
तो देखिए विधायक सिर्फ सिफारिश करता है। पैसा जिला प्रशासन खर्च करता है, ठेका, टेंडर, काम- सब नियमों से। लेकिन जब नियम फाइल में और नीयत साइलेंट मोड में चली जाए, तो फिर मामला जांच तक पहुंचता है। और शायद यही आज राजस्थान में हो रहा है, चार विधायकों पर जांच पहले ही जारी है और अब एक पूर्व विधायक भी इस राडार में शामिल हो गए है। हालांकि अभी तो सभी पर जांच जारी है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें बीजेपी, कांग्रेस, बीएपी, इन सभी पार्टियों से और एक निर्दलीय विधायक भी शामिल है।
मगर राजस्थान में आज मुद्दा ये नहीं कि विधायक किस पार्टी का है, मुद्दा ये है कि विधायक खुद को जनता के फंड का मालिक ना समझ बैठे। क्योंकि जब ऐसे मामले सामने आते है तो जनता को विश्वास टूटने लगता है और फिर इन राजनीतिक दलों के सामने जनता का भरोसा फिर से बहाल करना ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।