ट्वीटर आपस में भिड़े अशोक गहलोत और गजेंद्र सिंह खींवसर

Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Apr, 2026 07:55 PM

ashok gehlot vs gajendra singh khinvsar twitter clash

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में ट्वीट करके वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। जिसका जवाब अब गजेंद्र सिंह खींवसर ने दिया है। गहलोत ने लिखा था 'राजस्थान के गौरव बन चुके हमारे विश्वस्तरीय हेल्थ मॉडल को आज खुद...

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में ट्वीट करके वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। जिसका जवाब अब गजेंद्र सिंह खींवसर ने दिया है। गहलोत ने लिखा था 'राजस्थान के गौरव बन चुके हमारे विश्वस्तरीय हेल्थ मॉडल को आज खुद 'वेंटिलेटर' पर ला दिया है। 

 

यह बेहद शर्मनाक है कि भीषण गर्मी में मरीज घर से पंखे लाने को मजबूर हैं और RGHS का ₹2200 करोड़ का बकाया भुगतान न होने से इलाज ठप पड़ा है। हजारों फार्मासिस्टों की सेवाएँ समाप्त कर और करोड़ों के उपकरणों को कबाड़ बनाकर सरकार प्रदेश की जनता की सेहत के साथ जानलेवा खिलवाड़ कर रही है। 

 

हमारी कांग्रेस सरकार ने 'राइट टू हेल्थ' के जरिए जो गारंटी दी थी, भाजपा ने उसे कुप्रबंधन की भेंट चढ़ा दिया है। जनता यह अन्याय देख रही है और वक्त आने पर इसका कड़ा जवाब देगी।'

 

हालांकि, अब ट्वीट के जरिए ही इसका जवाब गजेंद्र सिंह खींवसर ने दिया है। उन्होंने लिखा 'पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं का जो बेड़ा गर्क किया, वह किसी से छिपा नहीं है। कोविडकाल में जमकर लूट मचाई गई। चुनावी वर्ष में बिना पर्याप्त वित्तीय प्रावधान और बिना प्लानिंग के प्रोजेक्ट शुरू किए।

 

आरजीएचएस योजना में नीतिगत खामियां रख अनियमितताओं को बढ़ावा दिया। भर्तियों के नाम पर केवल विज्ञापन निकाले, बिना डॉक्टर और बिना नर्सिंग स्टाफ चिकित्सा संस्थान चलते रहे। केंद्र सरकार से स्वीकृत नए मेडिकल कॉलेजों को शुरू करने में उदासीनता दिखाई। यही था कांग्रेस का स्वास्थ्य का भ्रष्ट मॉडल। 

 

वर्तमान भाजपा सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में जो काम किया है, वह भी किसी से छिपा नहीं है। दो वर्ष में रिकॉर्ड 35 हजार पदों पर भर्तियां कर गांव - ढाणी तक समुचित मानव संसाधन उपलब्ध करवाया गया है और करीब 15 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है। सात नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं। आरजीएचएस योजना में अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई की है। रिकॉर्ड संख्या में चिकित्सा संस्थानों के नए भवन बनाए हैं। हर वर्ष स्वास्थ्य के बजट को बढ़ाया है। इसके चलते निजी अस्पतालों के बजाय लोगों का सरकारी अस्पतालों पर विश्वास बढ़ा है। 

 

हमारी सरकार कांग्रेस सरकार की तरह राइट टू हेल्थ बिल का छलावा करने के बजाय वास्तविक रूप में लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार दे रही है।'

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