मेडिकल कॉलेज खुला, फिर भी नागौर के हार्ट मरीज ‘हायर सेंटर’ पर निर्भर

Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Feb, 2026 03:46 PM

medical college operational yet nagaur heart patients referred to higher centres

नागौर: नागौर में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत को स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया था, लेकिन जमीनी स्थिति अब भी चिंताजनक है। जिले के हार्ट मरीजों को गंभीर स्थिति में आज भी जोधपुर, बीकानेर या जयपुर रेफर किया जा रहा है। ऐसे मामलों में...

नागौर: नागौर में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत को स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया था, लेकिन जमीनी स्थिति अब भी चिंताजनक है। जिले के हार्ट मरीजों को गंभीर स्थिति में आज भी जोधपुर, बीकानेर या जयपुर रेफर किया जा रहा है। ऐसे मामलों में ‘गोल्डन ऑवर्स’—यानी हार्ट अटैक के बाद के शुरुआती महत्वपूर्ण घंटे—अक्सर सफर में ही निकल जाते हैं, जो मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

 

जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर में अभी तक नियमित कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी है। साथ ही कैथ लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप सीने में दर्द, हार्ट अटैक या जटिल हृदय रोग के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अन्य शहरों के बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ता है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, 24x7 आपातकालीन सेवाएं, कार्डियक केयर यूनिट (सीसीयू), डिफिब्रिलेटर, प्रशिक्षित स्टाफ और उन्नत जांच सुविधाएं—जैसे ईसीजी, इकोकार्डियोग्राम, टीएमटी और सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी—हृदय रोग उपचार के लिए अनिवार्य हैं। इसके अलावा एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग जैसी प्रक्रियाओं के लिए कैथ लैब जरूरी होती है। गंभीर मामलों में बायपास सर्जरी, वाल्व रिप्लेसमेंट और पेसमेकर प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं जीवन रक्षक साबित होती हैं, जो फिलहाल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं।

 

डॉक्टरों का कहना है कि कई बार मरीज को एम्बुलेंस से रेफर किया जाता है, लेकिन तीन से चार घंटे की दूरी और यातायात के कारण देरी हो जाती है। हार्ट अटैक के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर उपचार न मिलने से स्थायी हृदय क्षति या मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

 

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बाहर इलाज कराना भारी पड़ता है। निजी एम्बुलेंस, बड़े शहरों में रहने-खाने और उपचार का खर्च अतिरिक्त बोझ बन जाता है।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में बढ़ते हृदय रोग मामलों को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, कैथ लैब की स्थापना और 24 घंटे आपातकालीन कार्डियक सेवाओं की शुरुआत अत्यंत आवश्यक है। जब तक ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक नागौर के हार्ट मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज की शुरुआत अधूरी ही मानी जाएगी।

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