लाखों में सरकारी नौकरी बेचने वाला ठग कोर्ट में पेश, 3 दिन के रिमांड पर भेजा

Edited By Payal Choudhary, Updated: 07 Apr, 2026 03:44 PM

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जालोर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। आरोपी की पहचान राकेश कुमार (25) के रूप में हुई है, जो लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था और बदले में फर्जी नियुक्ति पत्र थमा...

जालोर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। आरोपी की पहचान राकेश कुमार (25) के रूप में हुई है, जो लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था और बदले में फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देता था। हैरानी की बात यह रही कि कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी के चेहरे पर न कोई डर था और न ही पछतावा—वह हंसते हुए पुलिस के साथ अदालत पहुंचा। कोर्ट ने उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार आरोपी जालोर के रतनपुरा रोड क्षेत्र में रहकर लंबे समय से यह ठगी का नेटवर्क चला रहा था। मूल रूप से वह पाली जिले के तखतगढ़ का रहने वाला है। उसने नगर परिषद में नौकरी लगवाने का लालच देकर बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाया। इसके लिए उसने बेहद शातिर तरीके अपनाए—फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए और उन पर अधिकारियों के नकली हस्ताक्षर भी किए।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने कई युवाओं से लाखों रुपए ऐंठे। भूति निवासी रितिक मीणा से करीब 10 लाख रुपए लिए गए, जबकि रणछोड़ कुमार और मुकेश कुमार से 3-3 लाख रुपए वसूले गए। इसके बाद आरोपी ने उन्हें अधिशासी अधिकारी, कनिष्ठ सहायक जैसे पदों पर नियुक्ति का झांसा दिया। जब पीड़ितों को नौकरी जॉइनिंग के दौरान सच्चाई का पता चला, तब मामला उजागर हुआ।

पुलिस ने बताया कि आरोपी ने रिटायर्ड संयुक्त निदेशक शम्भूलाल जागरवाल और नगर परिषद जालोर के आयुक्त के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर नियुक्ति पत्र जारी किए थे। पहली नजर में ये दस्तावेज इतने असली लगते थे कि पीड़ितों को शक नहीं हुआ। इसी का फायदा उठाकर आरोपी लंबे समय से लोगों को ठगता रहा।

मामला सामने आने के बाद पीड़ितों ने जालोर कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की और नगर परिषद व संबंधित बैंकों से दस्तावेज जुटाए। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और फिर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।

पुलिस का कहना है कि आरोपी पिछले कई वर्षों से इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकता है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने करीब 30 लोगों को ठगा है और 200 से ज्यादा लोगों से करोड़ों रुपए वसूले जाने की आशंका है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।

रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से यह जानने की कोशिश करेगी कि उसने फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए, किन लोगों की मदद ली और कितने लोगों को अब तक ठगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी सरकारी विभाग का कोई व्यक्ति इस गिरोह से जुड़ा तो नहीं है।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी नौकरी के नाम पर हो रही ठगी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर किसी को पैसे न दें और किसी भी तरह के ऑफर की पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।

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