Edited By Payal Choudhary, Updated: 28 Mar, 2026 07:52 PM

जालोर जिले में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला POCSO Act के तहत सुनाया गया, जिसे बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कड़ी कार्रवाई के लिए जाना जाता...
जालोर जिले में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला POCSO Act के तहत सुनाया गया, जिसे बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कड़ी कार्रवाई के लिए जाना जाता है।
मामला उस समय सामने आया जब एक मासूम बच्ची अपने जन्मदिन के दिन घर के पास स्थित दुकान पर चॉकलेट लेने गई थी। इसी दौरान आरोपी युवक ने उसे बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठा लिया और दूर सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
जन्मदिन बना दर्दनाक हादसा
पीड़िता के पिता द्वारा 8 जुलाई 2025 को पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, घटना एक दिन पहले यानी 7 जुलाई को हुई थी। बच्ची अपने जन्मदिन पर खुशी-खुशी चॉकलेट लेने निकली थी, लेकिन रास्ते में आरोपी ने उसे जबरन अपने साथ ले जाकर उसकी जिंदगी को झकझोर देने वाली घटना को अंजाम दिया।
यह घटना न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके को झकझोर देने वाली साबित हुई।
4 दिन तक बंधक बनाकर किया दुष्कर्म
जांच में सामने आया कि आरोपी ने नाबालिग को करीब 4 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसने पीड़िता के साथ बार-बार दुष्कर्म किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और पीड़िता को उसके कब्जे से सुरक्षित छुड़ाया।
पूछताछ के दौरान पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने कई बार उसके साथ जबरदस्ती की, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
पुलिस जांच और कोर्ट में पेशी
पुलिस ने मामले की गहन जांच करते हुए मजबूत सबूत जुटाए। जांच के दौरान कुल 36 दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए गए और 18 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
विशिष्ट लोक अभियोजक रणजीत सिंह राजपुरोहित ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना।
कोर्ट का सख्त फैसला
मामले की सुनवाई के बाद जालोर की पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश Seema Juneja ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज में असहनीय हैं और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
समाज के लिए कड़ा संदेश
यह फैसला समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और सख्त सजा से अपराधियों में डर पैदा होता है और पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होती है।
जागरूकता और सुरक्षा की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता की जरूरत को उजागर किया है।
- अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए
- बच्चों को अजनबियों से सतर्क रहने की शिक्षा देना जरूरी है
- समाज और प्रशासन को मिलकर सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में काम करना चाहिए
निष्कर्ष
जालोर पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला न्याय व्यवस्था की सख्ती और संवेदनशीलता दोनों को दर्शाता है। यह न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय का क्षण है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कानून बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ पूरी ताकत से खड़ा है।