Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jan, 2026 05:18 PM

जैसलमेर: जैसलमेर शहर में करंट की चपेट में आने से युवक की मौत के मामले में करीब 20 घंटे बाद रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। आपसी सहमति बनने के बाद परिजनों ने शव उठाया और अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव मोकळा रवाना हुए। घटना के बाद से मोर्चरी के बाहर...
जैसलमेर: जैसलमेर शहर में करंट की चपेट में आने से युवक की मौत के मामले में करीब 20 घंटे बाद रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। आपसी सहमति बनने के बाद परिजनों ने शव उठाया और अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव मोकळा रवाना हुए। घटना के बाद से मोर्चरी के बाहर बैठे परिजनों और ग्रामीणों में प्रशासन व सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर गहरा रोष देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, मृतक युवक स्वरूप एक अत्यंत गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था और मेरासी समाज का सदस्य था। शनिवार को वह जैसलमेर शहर की लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी में निर्माणाधीन होटल में मजदूरी का काम कर रहा था। इसी दौरान वह अचानक करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही हालत गंभीर हो गई। हादसे के तुरंत बाद अन्य मजदूरों और मौजूद लोगों ने उसे संभाला और निजी वाहन से जवाहर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को मोर्चरी में रखवाया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मोर्चरी के बाहर एकत्रित हो गए और धरने पर बैठ गए। परिजनों का आरोप था कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ। उन्होंने मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
रविवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर की मध्यस्थता में मृतक के परिजनों, ग्रामीणों और निर्माणाधीन होटल के मालिक के बीच लंबी वार्ता हुई। बातचीत के बाद होटल मालिक की ओर से मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और अन्य ग्रामीणों द्वारा भी सहयोग का आश्वासन दिया गया। इस आपसी सहमति के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम के लिए सहमति दी।
करीब 20 घंटे बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव को लेकर अपने पैतृक गांव मोकळा के लिए रवाना हुए, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष भाजपा के किसी भी जनप्रतिनिधि या नेता के धरने पर नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी बनी रही। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हादसों में पीड़ित परिवार के साथ खड़े होना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।