जैसलमेर में राष्ट्रपति ने ‘प्रचंड’ से भरी ऐतिहासिक उड़ान, आसमान से नमन किया सोनार किला और शक्ति स्थल!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 28 Feb, 2026 06:59 PM

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राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ, जब भारत की राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में को-पायलट के रूप में करीब 25 मिनट तक उड़ान भरी। यह पहला अवसर...

राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ, जब भारत की राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में को-पायलट के रूप में करीब 25 मिनट तक उड़ान भरी। यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय राष्ट्रपति ने लड़ाकू हेलिकॉप्टर में इस भूमिका में उड़ान भरकर सशस्त्र बलों के साथ प्रत्यक्ष अनुभव साझा किया।

उड़ान की शुरुआत भारतीय वायु सेना के वायुसेना स्टेशन जैसलमेर से हुई। राष्ट्रपति वायुसेना की कॉम्बैट ड्रेस में आर्मी कैंट से सीधे एयरबेस पहुंचीं। पूरे सैन्य प्रोटोकॉल के बीच उन्होंने अधिकारियों की सलामी ली और फिर ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर में सवार होकर आसमान की ओर रवाना हुईं।

आसमान से सोनार किला और शक्ति स्थल को नमन

उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार किला को आसमान से नमन किया। स्वर्णिम पत्थरों से बना यह किला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने पोकरण शक्ति स्थल की दिशा में भी सम्मान व्यक्त किया, जहां भारत के परमाणु परीक्षणों ने देश की सामरिक क्षमता को नई पहचान दी थी।

सूत्रों के अनुसार, उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने रेडियो के माध्यम से देशवासियों को संदेश भी दिया और आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक पर गर्व जताया।

‘प्रचंड’—आत्मनिर्भर भारत की ताकत

राष्ट्रपति ने जिस हेलिकॉप्टर में उड़ान भरी, वह स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने विकसित किया है। उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मारक क्षमता, आधुनिक एवियोनिक्स और घातक हथियार प्रणाली से लैस ‘प्रचंड’ भारतीय सेना और वायुसेना की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

राष्ट्रपति की यह उड़ान न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी एक सशक्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

वायुसेना प्रमुख भी रहे साथ

इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान दूसरे ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने पूरे अभियान की अगुवाई की। उड़ान से पहले और बाद में राष्ट्रपति ने वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, फोटो सेशन में हिस्सा लिया और जवानों का उत्साहवर्धन किया।

कॉम्बैट ड्रेस में सर्वोच्च कमांडर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वायुसेना के पायलट की ड्रेस में पूरी तरह आत्मविश्वास के साथ नजर आईं। उन्होंने ‘प्रचंड’ के कंट्रोल सिस्टम और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली। एयरबेस पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें हेलिकॉप्टर की मारक क्षमता और ऑपरेशन संबंधी बारीकियों से अवगत कराया।

वायुसेना स्टेशन के दौरे के दौरान उन्होंने गेस्ट बुक में संदेश भी लिखा और भारतीय वायुसेना के साहस, समर्पण और पेशेवर क्षमता की सराहना की।

ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना जैसलमेर

सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जैसलमेर इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। राष्ट्रपति की यह उड़ान सेना के मनोबल को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल सशस्त्र बलों के साथ नागरिक नेतृत्व के मजबूत संबंध को दर्शाती है।

करीब 25 मिनट की उड़ान के बाद राष्ट्रपति सुरक्षित एयरबेस पर लौटीं। इस दौरान उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया और सैन्य परंपराओं के अनुरूप सलामी ली।

राष्ट्रपति की ‘प्रचंड’ में यह उड़ान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की रक्षा क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सीमाओं की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई है।

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