Edited By Payal Choudhary, Updated: 05 Mar, 2026 04:31 PM
राजस्थान के जैसलमेर जिले में रेतीले धोरों के बीच बसे भागू का गांव में कौमी एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के पिता मरहूम गाजी फकीर की बरसी के अवसर पर भव्य रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।...
राजस्थान के जैसलमेर जिले में रेतीले धोरों के बीच बसे भागू का गांव में कौमी एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के पिता मरहूम गाजी फकीर की बरसी के अवसर पर भव्य रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग एक साथ बैठकर इफ्तार करते नजर आए और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
इफ्तार कार्यक्रम में करीब 2500 से अधिक रोजेदारों ने एक साथ रोजा खोला। आयोजन से पहले देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं की गईं। इसके बाद सभी लोगों ने एक ही दस्तरखान पर बैठकर रोजा इफ्तार किया, जो सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक बन गया।
इफ्तार में नेताओं की रही खास मौजूदगी
इस अवसर पर कई प्रमुख राजनीतिक नेता और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इफ्तार कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
हरीश चौधरी कार्यक्रम में पठानी सूट और गले में थार की पारंपरिक पहचान ‘अजरख’ पहने हुए नजर आए। उनका यह पारंपरिक पहनावा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
कार्यक्रम में बाड़मेर–जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व विधायक रूपाराम धनदे, बाड़मेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मण गोदारा, पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल और जैसलमेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी शिरकत की।
“अजरख किसी एक समुदाय की नहीं”
कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि अजरख मरुप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान है और इसे किसी एक समुदाय से जोड़कर देखना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि थार की संस्कृति लोगों को जोड़ने वाली संस्कृति है। ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करते हैं।
उन्होंने संकीर्ण सोच रखने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज को बांटने वाली विचारधाराओं से दूर रहकर हमें एकता और सद्भाव का संदेश देना चाहिए।
होली और रमजान का संगम
पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि थार की यही खूबसूरती है कि यहां अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हिंदू समाज ने होली का त्योहार मनाया है और दूसरी ओर मुस्लिम समाज रमजान के पवित्र महीने में रोजे रख रहा है। यह दोनों पर्व हमें मिलकर खुशियां बांटने और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश देते हैं।
सालेह मोहम्मद ने कहा कि जब समाज एकजुट रहता है तो हर मुश्किल का सामना करना आसान हो जाता है।
2500 से अधिक रोजेदारों ने किया इफ्तार
मरहूम गाजी फकीर की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रोजेदार शामिल हुए। इफ्तार से पहले देश और समाज की खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।
इसके बाद करीब 2500 से अधिक रोजेदारों ने एक साथ बैठकर रोजा खोला। आयोजन स्थल पर रोजेदारों के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर इफ्तार की व्यवस्था की गई थी ताकि सभी लोग आराम से इफ्तार कर सकें।
कार्यक्रम में सालेह मोहम्मद के परिवार के साथ-साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
नेताओं ने की सेवा
इफ्तार कार्यक्रम के दौरान कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रोजेदारों की सेवा भी की। उन्होंने रोजेदारों को फ्रूट जूस, खजूर और अन्य खाद्य सामग्री परोसकर सेवा का भाव दिखाया।
इस दौरान पूर्व पार्षद प्रवीण सुदा और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नवाबुद्दीन भाटी भी मौजूद रहे। उन्होंने भी रोजेदारों के साथ बैठकर इफ्तार किया और भाईचारे का संदेश दिया।
गाजी फकीर को किया याद
कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं और लोगों ने मरहूम गाजी फकीर के सामाजिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि गाजी फकीर ने हमेशा समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का काम किया।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल उनकी याद में यह इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें सभी समुदायों के लोग शामिल होते हैं।
भाईचारे का दिया संदेश
कुल मिलाकर जैसलमेर के भागू का गांव में आयोजित यह इफ्तार कार्यक्रम कौमी एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनकर सामने आया।
एक ही दस्तरखान पर बैठकर हजारों लोगों का रोजा खोलना इस बात का संदेश देता है कि विविधताओं के बावजूद समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखा जा सकता है।