Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 13 Aug, 2026 05:55 PM

भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विधानसभा अध्यक्ष ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वालों और विस्थापित परिवारों को किया याद, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का लिया संकल्प
जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों और उस कठिन दौर में पीड़ा एवं विस्थापन झेलने वाले परिवारों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर, परिवार और जन्मभूमि छोड़कर विस्थापित होना पड़ा तथा असंख्य लोगों ने हिंसा और बिछोह की पीड़ा सहन की।
देवनानी ने कहा कि भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें उस दौर की पीड़ा को याद करने के साथ देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान ने विस्थापितों को अपनाया
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विभाजन की त्रासदी से यह सीख मिलती है कि नफरत, हिंसा और वैमनस्य किसी भी समाज और राष्ट्र के लिए हितकारी नहीं हो सकते। भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता, आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत में निहित है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान ने विभाजन के समय विस्थापित होकर आए लोगों को अपनाया और उन्हें नए जीवन की शुरुआत करने में सहयोग दिया। यह प्रदेश की उस महान संस्कृति को दर्शाता है, जिसमें मानवता, सह-अस्तित्व और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना सर्वोपरि है।
इतिहास से सीख लेकर भविष्य को बनाएं बेहतर
देवनानी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य अतीत की पीड़ा को याद कर समाज में वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य को अधिक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और एकजुट बनाना है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को विभाजन की त्रासदी के कारणों और उसके परिणामों से अवगत कराना जरूरी है, ताकि उनमें देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सम्मान के प्रति प्रतिबद्धता विकसित हो सके।
विविधताओं के बीच एकता बनाए रखने का आह्वान
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदेशवासियों से विभाजन की पीड़ा को स्मरण करते हुए सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। सभी को मिलकर ऐसे भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जहां विविधताओं के बीच एकता कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों को एक सशक्त, शांतिपूर्ण, समरस एवं एकजुट राष्ट्र मिले।