Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jan, 2026 12:32 PM

जयपुर। साहित्य को समाज के अंतिम पायदान तक पहुँचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में, प्रथम बुक्स और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल (JLF) की साझेदारी से संचालित स्कूल आउटरीच प्रोग्राम ने अपने 16 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह कार्यक्रम फ़ेस्टिवल की भावना...
जयपुर। साहित्य को समाज के अंतिम पायदान तक पहुँचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में, प्रथम बुक्स और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल (JLF) की साझेदारी से संचालित स्कूल आउटरीच प्रोग्राम ने अपने 16 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह कार्यक्रम फ़ेस्टिवल की भावना को मुख्य मंचों से आगे बढ़ाकर उन समुदायों तक ले जाता है, जहाँ किताबों और पढ़ने के संसाधनों की उपलब्धता सीमित है।
पिछले सोलह वर्षों से यह आउटरीच प्रोग्राम स्कूलों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), शेल्टर होम्स, जुवेनाइल जस्टिस होम्स, आफ्टर-स्कूल सेंटर्स और कम्युनिटी स्पेसेज़ में वंचित बच्चों तक कहानियाँ, लेखक और रचनात्मक गतिविधियाँ सीधे पहुँचाने का कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य साहित्य को सुलभ, आनंददायक और बच्चों के जीवन से जुड़ा बनाना है।
वर्ष 2025 में, इस कार्यक्रम के तहत 17 से 24 दिसंबर के बीच दिल्ली में 25 आउटरीच सत्र आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 1,200 से अधिक बच्चों तक पहुँच बनाई गई। ये सत्र आसरा चिल्ड्रेन होम, उड़ान–DMRC चिल्ड्रेन होम फ़ॉर गर्ल्स, चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया, प्रांगण सेंटर्स, नई दिशा एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसाइटी, MCD स्कूल, सर्वोदय बाल विद्यालय और जुवेनाइल जस्टिस होम जैसे संस्थानों में आयोजित हुए। जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के दौरान भी यह कार्यक्रम समानांतर रूप से जारी रहा।
हर आउटरीच सत्र में इंटरएक्टिव स्टोरीटेलिंग, कठपुतली, संगीत, मूवमेंट और कला जैसी गतिविधियों के ज़रिए बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इन नवाचारी तरीकों ने बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि, कल्पनाशक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया।
अपने 16वें वर्ष में यह आउटरीच प्रोग्राम दिल्ली और जयपुर के 75 केंद्रों के माध्यम से लगभग 6,000 बच्चों तक पहुँचा। अब तक, प्रथम बुक्स और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल की साझेदारी के तहत 500 से अधिक संस्थानों में 1,000 से ज़्यादा आउटरीच सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 50,000 से अधिक बच्चे लाभान्वित हुए हैं।
प्रथम बुक्स के सीईओ हिमांशु गिरी ने कहा कि यह साझेदारी इस विश्वास पर आधारित है कि हर बच्चे को कहानियों का अधिकार है, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो। वहीं, आउटरीच टीम की गार्गी मल्ल ने बताया कि जब कहानियाँ बच्चों के अनुभवों से जुड़ती हैं, तो वे उनके लिए अधिक अर्थपूर्ण बन जाती हैं। यह पहल आज भी पढ़ने के समावेशी रास्ते खोलते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है।