Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Jan, 2026 04:22 PM

जयपुर। विश्व प्रसिद्ध जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) एक बार फिर साहित्य, कला और संस्कृति का भव्य संगम बना। इस अवसर पर राजस्थान की लोक कला और पारंपरिक वाद्य यंत्र नागाड़ा के प्रसिद्ध कलाकार नाथूलाल सोलंकी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने फेस्टिवल से अपने लगभग...
जयपुर। विश्व प्रसिद्ध जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) एक बार फिर साहित्य, कला और संस्कृति का भव्य संगम बना। इस अवसर पर राजस्थान की लोक कला और पारंपरिक वाद्य यंत्र नागाड़ा के प्रसिद्ध कलाकार नाथूलाल सोलंकी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने फेस्टिवल से अपने लगभग 19 वर्षों के जुड़ाव को साझा किया।
Punjab Kesari Rajasthan से विशेष बातचीत में नाथूलाल सोलंकी ने बताया कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने हमेशा लोक कलाकारों को सम्मान और मंच दिया है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों के बीच लोक कलाकारों को प्रस्तुति देने का अवसर मिलना अपने आप में गर्व की बात है। नाथूलाल सोलंकी ने बताया कि उनके परिवार में 13 पीढ़ियों से नागाड़ा वादन की परंपरा चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि नागाड़ा केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान है। ऐतिहासिक महल जैसे मंच पर प्रस्तुति देना कलाकारों के लिए प्रेरणादायक अनुभव होता है। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में जब युवा पीढ़ी तेजी से पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है, तब अपनी लोक कला और परंपराओं को सहेजना बेहद जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आज भी नागाड़ा, संग, दमामा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के पारंपरिक तरीके से ही बजाते हैं। नाथूलाल सोलंकी ने कहा कि नागाड़ा को उसकी मूल पहचान में जीवित रखना ही उनका कर्तव्य है और वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को आगे बढ़ाएं। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल लगातार ऐसे कलाकारों को मंच देकर भारतीय संस्कृति और लोक कला को वैश्विक पहचान दिला रहा है।