नागौर में पशुधन का महाकुंभ शुरू, रामदेव पशु मेले में ऊंट और नागोरी बैल बने आकर्षण

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jan, 2026 04:04 PM

nagaur hosts livestock grand fair as ramdev cattle fair begins

नागौर। नागौर जिले का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध रामदेव पशु मेला आज विधिवत रूप से शुरू हो गया। ध्वजारोहण के साथ मेले का शुभारंभ होते ही पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला। मेले में ऊंटों और प्रसिद्ध नागोरी बैल की धमाकेदार एंट्री ने रौनक बढ़ा दी...

नागौर। नागौर जिले का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध रामदेव पशु मेला आज विधिवत रूप से शुरू हो गया। ध्वजारोहण के साथ मेले का शुभारंभ होते ही पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला। मेले में ऊंटों और प्रसिद्ध नागोरी बैल की धमाकेदार एंट्री ने रौनक बढ़ा दी है। राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी पशुपालक और व्यापारी नागौर पहुंच रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में मेले की भव्यता और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

रामदेव पशु मेला न केवल पशुधन की खरीद-फरोख्त का केंद्र है, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति, लोक परंपराओं और पशुपालन की समृद्ध विरासत का भी प्रतीक माना जाता है। बीते पांच वर्षों में इस मेले में ऊंटों की संख्या लगातार बढ़ी है। इस वर्ष भी मेले के मैदान में ऊंटों की आवाजाही तेज हो गई है, जिससे पशुपालकों और व्यापारियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेंगे, मैदान पूरी तरह पशुधन से गुलजार हो जाएगा।

 

इस मेले की सबसे बड़ी खासियत नागोरी बैल हैं, जिनकी देशभर में विशेष पहचान है। यहां नागोरी बैल, भेड़ और ऊंटों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री होती है। अन्य राज्यों से आए व्यापारी भी सौदे करने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे साफ है कि इस बार मेला पहले से अधिक भव्य और व्यावसायिक रूप से सफल रहने वाला है।

 

रामदेव पशु मेले का इतिहास राजस्थान की लोक आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह मेला नागौर जिले के मानसर क्षेत्र में लोकदेवता श्री रामदेवजी की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिन्हें पशुओं के रक्षक और ग्रामीण जीवन के आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है। प्राचीन काल से पशुपालक रामदेवजी के दर्शन कर अपने पशुधन की सुख-समृद्धि की कामना करते रहे हैं। जोधपुर रियासत के शासकों, विशेषकर महाराजा उम्मेद सिंह के काल में इस मेले को नियमित और संगठित स्वरूप मिला।

 

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मेले में देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए विशेष टेंट व्यवस्था की गई है। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और लोक संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। पिछले वर्ष मेले में करीब चार हजार पशु आए थे, जिनमें दो हजार से अधिक ऊंट शामिल थे। इस वर्ष ऊंटों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पशुओं की भागीदारी और अधिक होने का अनुमान है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!