मेडिकल कॉलेजों की सम्बद्धता की जांच के लिए बनेगी उच्च स्तरीय समिति: स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर

Edited By Payal Choudhary, Updated: 06 Mar, 2026 05:58 PM

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राजस्थान सरकार मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता व्यवस्था की समीक्षा के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी। यह घोषणा राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री Gajendra Singh Khinvsar ने विधानसभा में की।

राजस्थान सरकार मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता व्यवस्था की समीक्षा के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी। यह घोषणा राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री Gajendra Singh Khinvsar ने विधानसभा में की।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। समिति आने वाले 15 दिनों के भीतर गठित की जाएगी, जो मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता व्यवस्था का परीक्षण करेगी और सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

विधानसभा में दिया जवाब

चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने यह जानकारी विधानसभा में शून्यकाल के दौरान सदस्य श्रीचंद कृपलानी द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी।

यह मुद्दा मेवाड़ क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता को लेकर उठाया गया था। हाल ही में इन कॉलेजों को जयपुर स्थित राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से हटाकर जोधपुर स्थित मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी से जोड़ने का निर्णय लिया गया था।

दो मेडिकल यूनिवर्सिटी से हो रहा संचालन

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों का संचालन दो प्रमुख मेडिकल विश्वविद्यालयों के माध्यम से किया जा रहा है।

इनमें शामिल हैं:

  • Rajasthan University of Health Sciences (RUHS), जयपुर

  • Marwar Medical University (MMU), जोधपुर

इन दोनों विश्वविद्यालयों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता और शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।

मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या

खींवसर ने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रयासों से देशभर में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा मिला है और राजस्थान में भी कई नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मेडिकल कॉलेज खुलने से चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़े हैं और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या और प्रदेश के भौगोलिक विस्तार को देखते हुए प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाने के लिए जोधपुर में मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी (MMU) की स्थापना की गई थी।

3500 विद्यार्थी कर रहे पढ़ाई

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जोधपुर स्थित एमएमयू के पहले बैच में करीब 3,500 विद्यार्थी नामांकित हैं।

यह विश्वविद्यालय मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आने वाले समय में यहां और भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

अब जोनवाइज संबद्धता की तैयारी

सरकार अब मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता को डिवीजन आधारित व्यवस्था से हटाकर जोनवाइज (क्षेत्रानुसार) प्रणाली में लाने की योजना बना रही है।

इस व्यवस्था के तहत क्षेत्र के अनुसार मेडिकल कॉलेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यों और शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन अधिक सुगमता से हो सकेगा।

विद्यार्थियों के लिए हेल्पलाइन

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मेडिकल छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने एक विशेष हेल्पलाइन सेवा भी शुरू की है।

इस हेल्पलाइन के माध्यम से छात्र अपनी पढ़ाई, परीक्षा, डिग्री और अन्य प्रशासनिक समस्याओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उच्च स्तरीय समिति करेगी परीक्षण

मंत्री खींवसर ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता व्यवस्था को लेकर उठे सवालों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए 15 दिनों के भीतर एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी

यह समिति पूरे मामले का विस्तृत अध्ययन करेगी और अपनी सिफारिशें सरकार को देगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी।

छात्रों को नहीं होगी परेशानी

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो छात्र जिस विश्वविद्यालय में नामांकित हैं, उन्हें उसी विश्वविद्यालय से उनकी डिग्री प्रदान की जाएगी।

इस फैसले से छात्रों की पढ़ाई या भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

एमएमयू के विकास पर 500 करोड़ खर्च

खींवसर ने बताया कि जोधपुर में स्थित मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी करीब 100 बीघा भूमि पर स्थापित की गई है

इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए कुल 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये के विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि अन्य निर्माण कार्य जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे।

चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने का लक्ष्य

राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है।

सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक छात्रों को मेडिकल शिक्षा के अवसर मिलें और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।

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