Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Mar, 2026 05:43 PM
राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व परियोजना पर काम लगातार आगे बढ़ रहा है। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा...
राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व परियोजना पर काम लगातार आगे बढ़ रहा है। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा अगस्त 2023 में इस परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रक्रियाएं जारी हैं।
उन्होंने कहा कि कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने से क्षेत्र में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए सफारी मार्ग प्रस्तावित
वन राज्य मंत्री ने बताया कि कुंभलगढ़ और टॉडगढ़-रावली अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए नए सफारी मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं।
इन प्रस्तावित मार्गों में
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कालीघाट से भीलभेरी
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फुलास से गोरम घाट
मुख्य रूप से शामिल हैं।
इसके अलावा वर्तमान में भी कुंभलगढ़ अभयारण्य में दो प्रमुख सफारी मार्ग संचालित हो रहे हैं। इनमें बीड़ की भागल से आरेट का फाटक और रणकपुर से मुछाला महावीर-घाणेराव मार्ग शामिल हैं।
इसी प्रकार टॉडगढ़-रावली अभयारण्य क्षेत्र में भी दो सफारी मार्ग पहले से मौजूद हैं, जिनमें
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प्लेनी से मोडिया रावली
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गोमथड़ा से गोरम घाट
मार्ग प्रमुख हैं।
वन विभाग का मानना है कि इन नए मार्गों के शुरू होने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होगा।
पैंथर सफारी के लिए भी संभावनाएं
वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने यह भी कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या सदस्य द्वारा पैंथर सफारी के लिए नया मार्ग सुझाया जाता है, तो उसका परीक्षण कर भविष्य में वहां सफारी गेट खोलने का प्रयास किया जाएगा।
इससे वन्यजीव पर्यटन को और अधिक विस्तार मिल सकता है।
NTCA से मिली सैद्धांतिक मंजूरी
विधानसभा में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की तकनीकी समिति की बैठक 4 अगस्त 2023 को आयोजित की गई थी।
इसके बाद 24 अगस्त 2023 को कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की गई।
इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं शुरू की गईं।
विशेषज्ञ समिति का गठन
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के गठन के लिए क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (Core Area) और बफर क्षेत्र के चिन्हांकन के लिए 24 जुलाई 2024 को 11 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया।
इस समिति ने विस्तृत अध्ययन करने के बाद 24 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसके बाद 23 जून 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा की गई।
केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव
वन विभाग द्वारा विशेषज्ञ समिति के अनुमोदन के बाद 11 अक्टूबर 2025 को कुंभलगढ़ बाघ परियोजना के कोर क्षेत्र का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया।
इसके बाद केंद्र सरकार और NTCA की ओर से कुछ आपत्तियां और सुझाव दिए गए।
इन आक्षेपों का समाधान करते हुए 24 फरवरी 2026 को राज्य सरकार ने अपना संशोधित जवाब NTCA को भेज दिया है।
रिजर्व क्षेत्र का विस्तार करने की सिफारिश
NTCA ने कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र की चौड़ाई बढ़ाने की भी सिफारिश की है।
इसके लिए राजसमंद, पाली और ब्यावर जिलों में अतिरिक्त भूमि चिन्हित की गई है।
वन विभाग ने इन जमीनों को वन विभाग के नाम स्थानांतरित करने के लिए राजस्व विभाग को पत्र भी भेज दिया है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा लाभ
वन राज्य मंत्री ने कहा कि जब कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व को अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा, तब इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी।
इससे
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होटल
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सफारी
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स्थानीय गाइड
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परिवहन
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हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं
जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
हालांकि अभी तक टाइगर रिजर्व घोषित नहीं होने के कारण पर्यटन वृद्धि का सटीक आंकलन नहीं किया गया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी दी जानकारी
मंत्री ने विधानसभा में यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं और पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का विवरण भी सदन के पटल पर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।