राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने ‘नो योर आर्मी–2026’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया, भारतीय सेना की ताकत और शौर्य की सराहना

Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jan, 2026 06:17 PM

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जयपुर। 78वें सेना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को ‘नो योर आर्मी–2026’ प्रदर्शनी का औपचारिक अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय सेना की सैन्य ताकत, तकनीकी क्षमता और शौर्य प्रदर्शन की सराहना करते...

जयपुर। 78वें सेना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को ‘नो योर आर्मी–2026’ प्रदर्शनी का औपचारिक अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय सेना की सैन्य ताकत, तकनीकी क्षमता और शौर्य प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि देश के लिए समर्पित सैनिकों का सम्मान हर नागरिक और संस्थान की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिकों और अधिकारियों के कार्य को राजकीय कार्यालयों एवं अन्य सभी स्थानों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

राज्यपाल ने विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में नौ ठिकानों पर सफल अभियान की रणनीतिक और साहसिक पहल को देख कर इसकी प्रशंसा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रदर्शनी में आयोजित डॉग शो का भी अवलोकन किया।

 

उन्होंने कहा कि ‘नो योर आर्मी’ भारतीय सेना की सैन्य शक्ति और संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन है। यह प्रदर्शनी नागरिकों को सेना की तकनीकी और शौर्य क्षमता के करीब से जानने का अवसर देती है। साथ ही इसमें प्रदर्शन किए गए स्वदेशी हथियार, रोबोटिक म्यूजिकल सिस्टम, ड्रोन, मिसाइल, डॉग स्क्वाड और मार्शल आर्ट्स जैसे लाइव शोज़ के माध्यम से लोगों को भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक से अवगत कराया गया।

 

राज्यपाल बागडे ने कहा कि यह पहल आम जनता को न केवल सेना के हथियार और तकनीकी उपकरणों के बारे में जानकारी देती है, बल्कि भारतीय जवानों के बलिदान और शौर्य को भी सीधे देखने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं और नागरिकों में देशभक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करेंगे।

 

प्रदर्शनी में उपस्थित नागरिक, छात्र और जवान भारतीय सेना के भविष्य के उपकरणों और कार्यप्रणाली से परिचित हुए और लाइव प्रदर्शन देखकर उत्साहित नजर आए। यह कार्यक्रम न केवल सेना और नागरिकों के बीच दूरी को कम करने का माध्यम बना, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सैनिकों के योगदान को समझने का भी अनूठा अवसर प्रदान किया।

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