जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के चौथे दिन सत्ता, न्याय और डिजिटल भविष्य पर वैश्विक मंथन

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jan, 2026 12:39 PM

global dialogue on power justice and the digital future on day four of jlf

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल (JLF) के चौथे दिन भी विचारों, बहसों और संवादों का सिलसिला पूरे प्रभाव के साथ जारी रहा। साहित्य, राजनीति, क़ानून और तकनीक से जुड़ी विश्व की प्रमुख हस्तियों ने सत्ता, न्याय, नेतृत्व और डिजिटल भविष्य जैसे जटिल विषयों पर...

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल (JLF) के चौथे दिन भी विचारों, बहसों और संवादों का सिलसिला पूरे प्रभाव के साथ जारी रहा। साहित्य, राजनीति, क़ानून और तकनीक से जुड़ी विश्व की प्रमुख हस्तियों ने सत्ता, न्याय, नेतृत्व और डिजिटल भविष्य जैसे जटिल विषयों पर गहन विमर्श किया।

 

तीसरे दिन के समापन पर कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास के सत्र ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से छू लिया। उन्होंने दुख को “पूरी तरह साँस न ले पाने” की अवस्था बताते हुए अपने जीवन के अनुभव साझा किए। एमी अवॉर्ड जीतने की रात को याद करते हुए उन्होंने शिकागो में बर्तन धोने से लेकर वैश्विक मंच तक की अपनी यात्रा को प्रेरक ढंग से प्रस्तुत किया।

 

चौथे दिन प्रसिद्ध लेखक रिचर्ड फ़्लैनगन ने टिम एडम्स के साथ बातचीत में पर्यावरणीय संकट, राजनीति और इतिहास के दौर में साहित्य की नैतिक ज़िम्मेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्मृति, इतिहास और कथा के रिश्ते को रेखांकित करते हुए कहा कि स्मृति हमेशा सच का बयान नहीं, बल्कि कई बार एक रचना भी होती है।

 

‘ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस: रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी’ सत्र में पोलैंड के पूर्व विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की ने नवतेज सरना के साथ यूरोप की भू-राजनीतिक चुनौतियों, यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सुरक्षा के भविष्य पर तीखा विश्लेषण प्रस्तुत किया। वहीं, आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर ने ‘स्पीकिंग माइ माइंड’ सत्र में सार्वजनिक जीवन, नेतृत्व और व्यक्तिगत विश्वासों के बीच संतुलन पर अपने विचार रखे।

 

दिन की सबसे अहम चर्चाओं में ‘आइडियाज़ ऑफ़ जस्टिस’ सत्र रहा, जिसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने वीर सांघवी के साथ संवाद में संवैधानिक नैतिकता, न्यायिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र में न्याय के बदलते अर्थ पर बात की। उन्होंने कहा कि न्याय एक जीवंत अनुभव है, जो गरिमा, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है।

 

डिजिटल भविष्य पर केंद्रित ‘दिस इज़ फ़ॉर एवरीवन’ सत्र में वर्ल्ड वाइड वेब के आविष्कारक सर टिम बर्नर्स-ली ने डिजिटल अधिकारों और इंटरनेट को सार्वजनिक संपदा के रूप में सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

 

दिन का समापन ‘द मर्डर डायलॉग’ सत्र से हुआ, जिसमें अपराध कथाओं, सिनेमा और नैतिक जटिलताओं पर रोचक चर्चा हुई। चौथे दिन के साथ ही जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल ने एक बार फिर वैश्विक विचार मंच के रूप में अपनी पहचान को मजबूत किया।

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