Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Jul, 2026 01:26 PM
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से आरंभ होकर 22 जुलाई को समाप्त होंगे लेकिन चतुर्थी तिथि का क्षय और नवमी तिथि की वृद्धि होने से...
जयपुर। हिंदू पंचांग के अनुसार पहली गुप्त नवरात्रि आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से प्रारंभ हो रही है। इस गुप्त नवरात्री के अवसर पर 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। यह समय महाकाली एवं भगवान शिव यानी कि शाक्त और शैव की पूजा करने वालों के लिए विशेष माना जाता है। तंत्र साधक इस दौरान विशेष साधनाएं करते हैं। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से आरंभ होकर 22 जुलाई को समाप्त होंगे लेकिन चतुर्थी तिथि का क्षय और नवमी तिथि की वृद्धि होने से गुप्त नवरात्रि का उत्थापन और व्रत पारण 23 जुलाई को होगा। इन नवरात्रों में 10 महाविद्याओं की पूजा करने का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दौरान तंत्र विद्या का विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है। इस समय की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली तथा चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और कोक्ष को देने वाली होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण समय मध्य रात्रि से सूर्योदय तक अधिक प्रभावशाली बताया गया है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को भी गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 22 जुलाई तक रहेगी। इसके बाद 23 जुलाई को व्रत का पारण किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार तीसरा और चौथा नवरात्र एक ही दिन 17 जुलाई को पड़ रहा है। नवरात्रि का पावन त्योहार आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल भर में कुल चार नवरात्रि आते हैं। जिसमें से दो चैत्र व शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। आषाढ़ मास में पड़ने वाले नवरात्रि को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धुम्रावती, मां बंगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ बुधवार 15 जुलाई से हो रहा है। 14 जुलाई को दोपहर 3:14 मिनट पर आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा, जो अलगे दिन यानी 15 जुलाई को सुबह 11:52 मिनट कर व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 15 जुलाई से ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी। वहीं 23 जुलाई को नवमी तिथि रहेगी जिसके साथ ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का समापन होगा।
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि प्रारंभः 14 जुलाई को दोपहर 3:14 मिनट पर
प्रतिपदा तिथि समापनः 15 जुलाई को सुबह 11:52 मिनट
उदया तिथि में आषाढ़ गुप्त नवरात्रिः 15 जुलाई 2026
आषाढ़ नवरात्रि घट स्थापना
प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना यानी मां के आवाहन से ही नवरात्रि का अनुष्ठान शुरू होता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर 15 जुलाई को ही घट स्थापना की जाएगी। जिसका शुभ मुहूर्त पुष्य नक्षत्र में होगा। इस दिन सुबह 8:02 मिनट का समय घट स्थापना के लिए सर्वोत्तम होगा। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा में 15 जुलाई बुधवार को पुष्य नक्षत्र, हर्षण योग एवं सिद्ध योग में गुप्त नवरात्र शुरू होगा।
घटस्थापना मुहूर्त: प्रातः 6:01 से 10:17 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:11 से 4:52 बजे तक
घटस्थापना का शुभ समय 15 जुलाई को सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
10 महाविद्याओं की साधना
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्या की भी पूजा की जाती है।
मां काली मां तारा मां त्रिपुर सुंदरी मां भुवनेश्वरी मां छिन्नमस्ता मां त्रिपुर भैरवी मां धूमावती मां बगलामुखी मां मातंगी मां कमला
गुप्त नवरात्रि
प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा
द्वितीया तिथि - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तृतीया तिथि - मां चंद्रघंटा की पूजा
चतुर्थी तिथि - मां कूष्मांडा की पूजा
पंचमी तिथि - मां स्कंदमाता की पूजा
षष्ठी तिथि - मां कात्यायनी की पूजा
सप्तमी तिथि - मां कालरात्रि की पूजा
अष्टमी तिथि - मां महागौरी की पूजा
नवमी तिथि - मां सिद्धिदात्री की पूजा
दशमी- नवरात्रि का पारण
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
15 जुलाई 2026, बुधवार - पहला नवरात्र - घटस्थापना, मां शैलपुत्री की पूजा
16 जुलाई 2026, गुरुवार - दूसरा नवरात्र - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
17 जुलाई 2026, शुक्रवार - तीसरा और चौथा नवरात्र - मां चन्द्रघण्टा और मां कूष्माण्डा की पूजा
18 जुलाई 2026, शनिवार - पांचवां नवरात्र - मां स्कन्दमाता पूजा
19 जुलाई 2026, रविवार - छठा नवरात्र - मां कात्यायनी पूजा
20 जुलाई 2026, सोमवार - सातवां नवरात्र - मां कालरात्रि पूजा
21 जुलाई 2026, मंगलवार - आठवां नवरात्र - दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी पूजा
22 जुलाई 2026, बुधवार - नौवां नवरात्र - मां सिद्धिदात्री पूजा, महा नवमी
23 जुलाई 2026, गुरुवार - नवरात्रि व्रत का पारण
गुप्त नवरात्रि में करते हैं विशेष साधना
आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना के लिए विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है। इस नवरात्रि में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।