चित्तौड़गढ़ का ‘खेल गांव सावता’ बना हैंडबॉल की नर्सरी, अब अमरीका में गूंजेगा गांव का नाम

Edited By Anil Jangid, Updated: 07 Jan, 2026 04:12 PM

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चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की वीर भूमि अब केवल इतिहास और शौर्य के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के लिए भी पहचान बना रही है। चित्तौड़गढ़ जिले का छोटा सा गांव पुरोहितों का सावता आज हैंडबॉल के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बना...

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की वीर भूमि अब केवल इतिहास और शौर्य के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के लिए भी पहचान बना रही है। चित्तौड़गढ़ जिले का छोटा सा गांव पुरोहितों का सावता आज हैंडबॉल के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। गांव में हैंडबॉल के प्रति ऐसा जुनून देखने को मिलता है कि अब इसे लोग सम्मान से ‘खेल गांव सावता’ कहने लगे हैं।

 

इस गांव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यहां से लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल रहे हैं। गांव की इस खेल यात्रा का सबसे चमकता सितारा नीतेश अहीर है, जिसने न सिर्फ राजस्थान टीम की ओर से खेलते हुए सिल्वर मेडल जीता, बल्कि इंडिया के बेस्ट गोलकीपर का खिताब भी अपने नाम किया। नीतेश का चयन अब अंडर-17 इंटरनेशनल हैंडबॉल टूर्नामेंट के लिए भारतीय टीम में हुआ है। आगामी 20 अप्रैल को अमरीका में आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट में नीतेश भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके साथ ही ‘खेल गांव सावता’ का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगा।

 

गांव की इस सफलता के पीछे कोच जवान सिंह और अध्यापक रतनलाल अहीर का अथक परिश्रम और समर्पण सबसे बड़ा आधार है। इन दोनों गुरुओं की देखरेख में गांव के हैंडबॉल ग्राउंड पर रोजाना सुबह दो घंटे और शाम को तीन घंटे कड़ा अभ्यास कराया जाता है। खिलाड़ियों में अनुशासन, फिटनेस और खेल भावना को प्राथमिकता दी जाती है। शिक्षक रतनलाल अहीर बताते हैं कि अब तक गांव में दो बार राज्य स्तरीय टूर्नामेंट आयोजित हो चुके हैं और तीन बार नेशनल कैंप का सफल आयोजन किया गया है।

 

आंकड़े भी गांव की उपलब्धियों की गवाही देते हैं। अब तक सात खिलाड़ी नेशनल लेवल पर खेलकर मेडल जीत चुके हैं, जबकि 25 बालक-बालिकाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अलावा 125 से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तर पर खेल चुके हैं, जो किसी छोटे गांव के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

 

हालांकि गांव में खेल सुविधाओं का अभाव आज भी एक बड़ी चुनौती है। हैंडबॉल ग्राउंड साधारण है और आधुनिक संसाधन सीमित हैं, लेकिन खिलाड़ियों के हौसले और कोचों का मार्गदर्शन इन कमियों पर भारी पड़ रहा है। गांव के हर घर में अब हैंडबॉल को लेकर गर्व और उत्साह है। बच्चे छोटी उम्र से ही इस खेल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

 

‘खेल गांव सावता’ आज यह साबित कर रहा है कि अगर जज्बा, अनुशासन और सही मार्गदर्शन हो, तो संसाधनों की कमी कभी भी प्रतिभा के रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती। आने वाले समय में इस गांव से और भी कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलने की उम्मीद की जा रही है, जो मेवाड़ और राजस्थान का नाम रोशन करेंगे।

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