बारां के लहसुन को मिलेगा जीआई टैग, किसानों के लिए खुलेगा अंतरराष्ट्रीय पहचान और बेहतर दाम का रास्ता

Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jan, 2026 04:17 PM

baran garlic set to receive gi tag opening doors to global recognition and bett

बारां। राजस्थान के कृषि मानचित्र पर अपनी खास पहचान रखने वाला बारां जिले का लहसुन अब जल्द ही वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। जिले के लहसुन को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने के लिए कृषि उपज मंडी समिति बारां ने औपचारिक...

बारां। राजस्थान के कृषि मानचित्र पर अपनी खास पहचान रखने वाला बारां जिले का लहसुन अब जल्द ही वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। जिले के लहसुन को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने के लिए कृषि उपज मंडी समिति बारां ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत लहसुन की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव तैयार कर बौद्धिक संपदा कार्यालय, चेन्नई भेजा गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत होगा और बारां के लहसुन को जीआई टैग मिल जाएगा।

 

कृषि उपज मंडी समिति ने करीब एक माह पूर्व इस दिशा में पहल की थी। प्रस्ताव कृषि महाविद्यालय बारां, कृषि विश्वविद्यालय कोटा और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड जयपुर के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे ‘आवेदक समूह उत्पादकों’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है, जो कृषि उत्पाद बाजार समिति बारां के नाम से पंजीकृत होगा। जीआई टैग मिलने से जिले के लहसुन को कानूनी संरक्षण मिलेगा और उसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी।

 

लहसुन उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी बारां
दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में स्थित बारां जिला लहसुन उत्पादन के मामले में प्रदेश में अग्रणी है। औषधीय श्रेणी की इस फसल में बारां क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता—तीनों ही दृष्टियों से राजस्थान में प्रथम स्थान रखता है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में औसतन 89,805 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की बुवाई होती है, जिसकी औसत उत्पादकता 5,916 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। वहीं बारां जिले में औसतन 30,714 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की खेती होती है और उत्पादकता 6,133 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है। पिछले तीन-चार वर्षों से जिले में औसतन 16 लाख क्विंटल लहसुन मंडियों में पहुंच रहा है।

 

क्यों खास है बारां का लहसुन
बारां के लहसुन की अलग पहचान का सबसे बड़ा कारण यहां की काली मिट्टी है, जिसमें पोटाश तत्व की मात्रा अधिक पाई जाती है। पोटाश लहसुन की गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध को बेहतर बनाता है। लहसुन की कली में पाए जाने वाले ‘डाई एमिल डाई सल्फाइड’ नामक ऑर्गेनो सल्फर यौगिक के कारण इसकी तेज गंध और औषधीय गुण लंबे समय तक बने रहते हैं। कम तापमान और अनुकूल जलवायु भी इसकी गुणवत्ता को और बढ़ाती है।

 

जीआई टैग से क्या होगा फायदा
जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक पहचान से जोड़ता है और यह प्रमाणित करता है कि उसकी गुणवत्ता और विशेषताएं उसी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इससे नकली या मिलावटी उत्पादों पर रोक लगेगी, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बारां के लहसुन को नई पहचान मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले के कृषि और विपणन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।

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