मेवाड़ की परंपरा को मिला सैन्य सम्मान, डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ हुए विशेष पुरस्कार से सम्मानित

Edited By Anil Jangid, Updated: 17 Jan, 2026 12:19 PM

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उदयपुर। मेवाड़ की शौर्य, सेवा और परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौरवपूर्ण पहचान मिली है। भारतीय सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को समाज सेवा...

उदयपुर। मेवाड़ की शौर्य, सेवा और परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौरवपूर्ण पहचान मिली है। भारतीय सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और अनुकरणीय योगदान के लिए भारतीय सेना की ओर से विशेष सैन्य पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

 

यह सम्मान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ द्वारा भारतीय सेना को कोविड-19 जैसी विषम परिस्थितियों में दो हाईटेक एंबुलेंस भेंट करने, सेना की सेवा में सदैव समर्पित रहने तथा समाजहित में किए गए विविध पुनीत कार्यों के लिए प्रदान किया गया। डॉ. मेवाड़ ने शिक्षा, महिला शिक्षा, चिकित्सा सेवाओं, महिला स्वच्छता प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन सामाजिक अभियानों के तहत उनके नेतृत्व में किए गए कार्यों को वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली है और अब तक 9 गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स उनके नाम दर्ज हो चुके हैं।

 

सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उनके लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मेवाड़ क्षेत्र के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि मेवाड़ की शौर्य परंपरा आज भी भारतीय सेना में 9वीं बटालियन द ग्रेनेडियर्स (मेवाड़) के रूप में जीवंत है। मेवाड़ राजघराने और इस बटालियन के बीच ऐतिहासिक, भावनात्मक और परंपरागत रूप से अत्यंत मजबूत संबंध रहा है।

 

डॉ. मेवाड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप की अदम्य वीरता, त्याग और स्वाभिमान से प्रेरित यह बटालियन अपने अनुशासन, साहस और बलिदान के लिए पूरे देश में जानी जाती है। यह बटालियन न केवल मेवाड़ बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए गौरव का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियां भी सेवा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की इसी परंपरा को आगे बढ़ाएंगी।

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