मेवाड़ ‘रॉयल वॉर’: अरबों की संपत्ति पर भाई-बहन की कानूनी जंग, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 18 Mar, 2026 06:49 PM

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उदयपुर, जिसे झीलों की नगरी और शाही विरासत के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक बड़े पारिवारिक और कानूनी विवाद का केंद्र बना हुआ है। मेवाड़ के पूर्व महाराज अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनकी अरबों की संपत्ति को लेकर भाई-बहन के बीच विवाद छिड़ गया है।

शाही विरासत पर छिड़ी कानूनी जंग

उदयपुर, जिसे झीलों की नगरी और शाही विरासत के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक बड़े पारिवारिक और कानूनी विवाद का केंद्र बना हुआ है। मेवाड़ के पूर्व महाराज अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनकी अरबों की संपत्ति को लेकर भाई-बहन के बीच विवाद छिड़ गया है।

यह मामला अब देश के चर्चित कानूनी मामलों में शामिल हो चुका है, जिसमें विरासत, वसीयत और संपत्ति के अधिकार जैसे कई अहम सवाल जुड़े हैं।

बेटी ने जताया बराबरी का दावा

अरविंद सिंह मेवाड़ की बेटी पद्मजा कुमारी परमार ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनके पिता का निधन बिना किसी वसीयत (Will) के हुआ है। ऐसे में संपत्ति पर उनका भी बराबर अधिकार बनता है।

उन्होंने सिटी पैलेस और HRH होटल्स ग्रुप सहित अन्य संपत्तियों के प्रबंधन के लिए अदालत से अंतरिम प्रशासक नियुक्त करने की मांग भी की थी।

वसीयत सामने आने से बदला पूरा मामला

मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब अदालत में एक वसीयत पेश की गई। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि फरवरी 2025 में ही अरविंद सिंह मेवाड़ ने एक वसीयत तैयार की थी।

इस वसीयत में उन्होंने अपनी स्व-अर्जित संपत्तियों का एकमात्र वारिस अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को घोषित किया था। इसी आधार पर कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने पद्मजा कुमारी की याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि जब वसीयत मौजूद है और उससे जुड़ा मामला पहले से विचाराधीन है, तो प्रशासन पत्र (Letters of Administration) की मांग का कोई औचित्य नहीं बनता।

साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक वसीयत को अवैध साबित नहीं किया जाता, तब तक किसी अंतरिम प्रशासक की नियुक्ति की आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट को करना पड़ा हस्तक्षेप

इस मामले की जटिलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह विवाद अलग-अलग अदालतों में चल रहा था।

  • लक्ष्यराज सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की

  • पद्मजा कुमारी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में वसीयत को चुनौती दी

बाद में दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए सभी मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।

4 मई को अगली सुनवाई, वसीयत पर होगा बड़ा फैसला

हालांकि फिलहाल पद्मजा कुमारी की याचिका खारिज हो गई है, लेकिन यह कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी, जिसमें वसीयत की वैधता पर अहम फैसला आने की संभावना है।

सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, बड़ा कानूनी सवाल

मेवाड़ का यह ‘रॉयल वॉर’ अब केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं रह गया है। यह मामला विरासत के अधिकार, वसीयत की वैधता और अरबों की कॉरपोरेट संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े बड़े कानूनी सवालों को भी सामने ला रहा है।

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