Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Feb, 2026 03:22 PM

उदयपुर। उदयपुर में एक सनसनीखेज डिजिटल ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से 67.90 लाख रुपये ठगने वाले गिरोह के एक और सदस्य को पुलिस ने नागौर से गिरफ्तार किया है।
उदयपुर। उदयपुर में एक सनसनीखेज डिजिटल ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से 67.90 लाख रुपये ठगने वाले गिरोह के एक और सदस्य को पुलिस ने नागौर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी सुखराम, नागौर के खींवसर का रहने वाला है और उसने अपने बैंक खाते को साइबर ठगों को बेच दिया था, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम को छिपाने के लिए किया गया था। इससे पहले पुलिस ने यादवेंद्र सिंह नाम के एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया था।
ठगी की यह घटना 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुई, जब भरत व्यास और उनकी पत्नी आशा व्यास को एक अज्ञात व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली सीबीआई का अधिकारी 'लक्ष्मण' बताया और उन्हें धमकाते हुए कहा कि उनके नाम पर एक गंभीर शिकायत दर्ज है, जिसमें उनके संबंध 'नरेश' नाम के अपराधी से हैं और उन्होंने 20 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया है।
ठगों ने दंपति को पूरी तरह से विश्वास में लेने के लिए एक सोची-समझी रणनीति अपनाई। 'लक्ष्मण' ने कॉल को सीबीआई के एडिशनल एसपी समाधान पंवार से जोड़ा और पंवार ने दंपति को धमकाकर उनकी संपत्ति, बैंक बैलेंस और गहनों की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद एक फर्जी मजिस्ट्रेट को भी जोड़ा गया, जिसने 'डिजिटल कोर्ट' का नाटक करते हुए कहा कि दंपति मनी लॉन्ड्रिंग में दोषी पाए गए हैं और जमानत के लिए 11.90 लाख रुपये कोर्ट के खाते में जमा करने होंगे।
कानूनी कार्रवाई और जेल जाने के डर से दंपति ने ठगों के निर्देशों पर पैसे ट्रांसफर किए। अलग-अलग किश्तों में ठगों ने उनके खातों से कुल 67.90 लाख रुपये निकाल लिए। जब तक दंपति को ठगी का अहसास हुआ, उनकी जीवनभर की कमाई लुट चुकी थी।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी सुखराम को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ की। इस गिरोह के सभी सदस्य अब पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस अधिकारी विनय चौधरी ने कहा कि यह गिरफ्तारी साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए गए अभियान की बड़ी सफलता है और ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।