टोंक में 45 साल बाद फिर शुरू होगा भूमि सैटलमेंट, डिजिटल तकनीक से होगी नाप-जोख

Edited By Anil Jangid, Updated: 13 Feb, 2026 04:09 PM

land settlement process to resume in tonk district after 45 years

टोंक। राजस्थान के Tonk जिले में करीब 45 साल बाद भूमि सैटलमेंट की प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है। पीपलू, देवली और मालपुरा क्षेत्र में वर्ष 1978-81 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर सैटलमेंट कार्य किया जाएगा। प्रशासन के अनुसार यह प्रक्रिया लगभग एक...

टोंक। राजस्थान के Tonk जिले में करीब 45 साल बाद भूमि सैटलमेंट की प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है। पीपलू, देवली और मालपुरा क्षेत्र में वर्ष 1978-81 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर सैटलमेंट कार्य किया जाएगा। प्रशासन के अनुसार यह प्रक्रिया लगभग एक वर्ष तक चलेगी और आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से जमीन की नाप-जोख की जाएगी, जिससे अधिक सटीक और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार हो सकेंगे।

 

इस दौरान गांव-गांव में ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। संबंधित हल्का पटवारी और सैटलमेंट टीम ग्रामीणों को प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देगी। किसानों की समस्याएं सुनी जाएंगी और मौके पर ही आवश्यक जानकारी एकत्र कर आपत्तियां दर्ज की जाएंगी। इससे भूमि रिकॉर्ड से जुड़े विवादों के समाधान में भी सहायता मिलेगी।

 

पीपलू क्षेत्र में इस कार्य के लिए 13 सैटलमेंट अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। अब खेतों की माप आधुनिक उपकरणों से की जाएगी, जबकि पहले जरीब से पारंपरिक तरीके से नाप-जोख होती थी। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से नामांतरण, बंटवारा और अन्य राजस्व संबंधी कार्य भविष्य में अधिक सरल और तेज होंगे।

 

हाल ही में ग्राम पंचायत सोहेला में सैटलमेंट टीम द्वारा ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसमें भू प्रबंधक (सेटलमेंट) विनोद जैन सहित राजस्व विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

 

गौरतलब है कि जिले की उनियारा, अलीगढ़ और दूनी तहसीलों में सैटलमेंट कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब पीपलू, देवली और मालपुरा में इस प्रक्रिया की शुरुआत से किसानों को अपनी भूमि से जुड़े दस्तावेज अपडेट कराने और भविष्य के विवादों से बचने का अवसर मिलेगा।

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