Edited By Anil Jangid, Updated: 23 Feb, 2026 03:14 PM

श्रीगंगानगर: श्रीगंगानगर जिले में विकास कार्य ठप पड़े हैं और शहर की सड़कों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। नई सड़कों का निर्माण टेंडर प्रक्रिया अटकने के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है, जबकि पुरानी सड़कें जलापूर्ति सुधार के लिए बिछाई जा रही वाटरलाइन...
श्रीगंगानगर: श्रीगंगानगर जिले में विकास कार्य ठप पड़े हैं और शहर की सड़कों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। नई सड़कों का निर्माण टेंडर प्रक्रिया अटकने के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है, जबकि पुरानी सड़कें जलापूर्ति सुधार के लिए बिछाई जा रही वाटरलाइन के कारण कई जगह धंस चुकी हैं। इससे आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर के कई हिस्सों में मरम्मत कार्य समय पर न होने के कारण गड्ढे और उखड़े हिस्से दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। आचार्य तुलसी मार्ग पर रामलीला मैदान के कार्नर से लेकर पूर्व सभापति करुणा चांडक के आवास तक सड़क पर बड़े गड्ढे हैं, जहां रोजाना दोपहिया वाहन गिर रहे हैं। यहां निर्माणाधीन भूखंड धारक ने मलबा डाल दिया है, लेकिन वाहनों के गुजरने से यह मिट्टी में बदल चुका है। इसी तरह गोपीराम बगीची से नई धानमंडी गेट तक सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई है।
यूआईटी क्षेत्र में मोटर मार्केट की मुख्य रोड, चहल चौक से जस्सासिंह मार्ग चौराहे तक सड़क सीवर लाइन लीकेज के कारण धंस चुकी है। इसे ठीक कराने के करीब चालीस दिन हो चुके हैं, लेकिन न्यास प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। व्यस्त मार्ग होने के कारण यहां बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है।
नगर परिषद में पिछले 16 माह से सभापति का पद खाली है और निकाय चुनाव नहीं होने से प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में कमान है। वहीं यूआईटी में आठ सालों से अध्यक्ष का पद रिक्त है। जनप्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी के कारण शहरहित के काम रुक गए हैं। अफसरों की मनमर्जी और कृपा वाले क्षेत्रों में ही सड़कें ठीक रखी जा रही हैं।
वाटर लाइन और सीवर बिछाने के बाद ठेकेदारों द्वारा की गई लीपापोती पर भी कुछ समय पहले विधायक जयदीप बिहाणी ने घुड़की दी थी, लेकिन इसका ठेकेदारों पर कोई असर नहीं पड़ा। परिणामस्वरूप बजट तो खर्च हो रहा है, लेकिन वास्तविक सड़क निर्माण और मरम्मत अधर में लटकी हुई है।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार खराब सड़कों के कारण फिसलन और वाहन क्षति की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। स्कूल बस, एंबुलेंस और निजी वाहन गड्ढों के कारण रूट बदलकर चलने को मजबूर हैं। व्यस्त बाजार और अस्पताल मार्गों पर जाम की स्थिति बन रही है।
शहरवासियों का कहना है कि अगर नगर परिषद और यूआईटी में जनप्रतिनिधि पदस्थ होते, तो सड़कें समय पर बनी होती और विकास कार्य बाधित नहीं होते। फिलहाल शहर का विकास पूरी तरह थमा हुआ नजर आ रहा है।