सीकर में संतों का हुंकार, गोवध रोकने के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान

Edited By Anil Jangid, Updated: 23 Feb, 2026 02:55 PM

saints raise voice in sikar declaring nationwide campaign

सीकर: सीकर जिले के रैवासा गांव स्थित अग्रपीठ में जानकीनाथ पाटोत्सव कार्यक्रम के दौरान संतों और महात्माओं ने गोवंश संरक्षण और संवर्द्धन के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा शामिल हुए।

सीकर: सीकर जिले के रैवासा गांव स्थित अग्रपीठ में जानकीनाथ पाटोत्सव कार्यक्रम के दौरान संतों और महात्माओं ने गोवंश संरक्षण और संवर्द्धन के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा शामिल हुए।

 

मलूक पीठ और अग्रपीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज ने गौ संरक्षण के लिए ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक देश में गाय की रक्षा, सम्मान और अनुदान सुनिश्चित नहीं हो जाता। इस अभियान के तहत 27 अप्रैल 2026 को देशभर में ‘गौ सम्मान दिवस’ मनाया जाएगा और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

 

कार्यक्रम में संतों ने जोर देकर कहा कि गौ हत्या के कारण देश में शर्मिंदगी बढ़ रही है और यह कलंक भारत से मिटाना आवश्यक है। राजेंद्रदास महाराज ने बताया कि संत समुदाय क्रमिक आमरण अनशन पर बैठकर गो संरक्षण कानून बनने तक अभियान को नहीं रोकेगा। उन्होंने गौ आधारित शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और पंचगव्य को अनिवार्य बनाने का लक्ष्य भी रखा।

 

कार्यक्रम को मनोहर शरण महाराज (पलसाना), दिनेशगिरी महाराज (फतेहपुर), प्रकाशदास महाराज और महावीर जति महाराज सहित कई संतों ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब राजा गोधर्म का पालन करेगा तभी समाज भी दिल से गो संरक्षण में सक्रिय होगा।

 

संतों ने सीतामढ़ी में सीतामाता के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण की मांग की और इसके लिए सरकार को पत्र लिखा जाएगा। अभियान का उद्देश्य भारत को RSS के शताब्दी वर्ष तक गौवध के कलंक से मुक्त करना है।

 

संतों ने जनता से अपील की कि वे इस अभियान में सहयोग दें और गौ संरक्षण के प्रति जागरूक रहें। राजेंद्रदास महाराज ने स्पष्ट किया कि गोवंश के सम्मान और सुरक्षा के लिए कोई समझौता नहीं होगा और कानून बनने तक यह अभियान निरंतर चलेगा।

 

यह कार्यक्रम सीकर जिले में गौ संरक्षण और धार्मिक चेतना को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जिसमें धार्मिक नेता और सामाजिक संगठनों का सहयोग विशेष रूप से देखा गया।

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