राजेश पायलट ने चबाए थे पाक को नाको चने, जानिए उनका संघर्ष से सत्ता तक का प्रेरक सफर

Edited By Anil Jangid, Updated: 11 Jun, 2026 05:09 PM

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दौसा। भारतीय राजनीति में अपनी संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि और बेबाक छवि के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की 26वीं पुण्यतिथि पर उनके जीवन से जुड़े कई प्रेरक और रोचक किस्से एक बार फिर चर्चा में हैं। गाजियाबाद के बैदपुरा गांव में...

दौसा। भारतीय राजनीति में अपनी संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि और बेबाक छवि के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की 26वीं पुण्यतिथि पर उनके जीवन से जुड़े कई प्रेरक और रोचक किस्से एक बार फिर चर्चा में हैं। गाजियाबाद के बैदपुरा गांव में जन्मे राजेश्वर प्रसाद बिधूड़ी ने कड़े संघर्षों के बीच अपनी पहचान बनाई और बाद में राजेश पायलट के नाम से देश की राजनीति और वायुसेना दोनों में विशेष स्थान हासिल किया।

 

राजेश पायलट का बचपन अत्यंत गरीबी में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि सर्दियों की रातों में वे डेयरी में भैंसों के पास सोकर खुद को ठंड से बचाते थे। पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने मेहनत के अनोखे तरीके अपनाए और सहपाठियों का होमवर्क करके बदले में ऑमलेट जैसे छोटे इनाम लेते थे।

 

उनका जीवन एक असाधारण यात्रा रहा, जिसमें साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर वे देश के गृह राज्य मंत्री बने। दिल्ली में जिस क्षेत्र में वे कभी दूध बांटा करते थे, वहीं उन्हें बाद में सरकारी आवास मिला—जिसे उनके संघर्ष और सफलता की प्रतीकात्मक कहानी के रूप में देखा जाता है।

 

वायुसेना में पायलट रहते हुए 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनकी भूमिका को साहसिक माना जाता है। युद्ध के दौरान एक रेडियो सिग्नल को उन्होंने तुरंत पहचानकर संभावित भ्रम को टाल दिया और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनके साहस और निर्णय क्षमता की चर्चाएं आज भी की जाती हैं।

 

1980 के दशक में राजनीतिक करियर की शुरुआत करते हुए उन्होंने पायलट नाम अपनाया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया। बताया जाता है कि उन्होंने एक औपचारिक प्रक्रिया के जरिए अपना नाम बदलकर इसे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में स्थायी पहचान दी।

 

विदेशी दौरों के दौरान भी उनकी वायुसेना पृष्ठभूमि के चलते उन्हें विशेष सम्मान मिला और उन्हें फाइटर जेट उड़ाने का अवसर दिया गया, जिसे उनकी तकनीकी दक्षता और अनुभव का प्रतीक माना जाता है।

 

राजनीतिक जीवन में भी वे अपने कड़े फैसलों के लिए जाने गए, जिसमें प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की उनकी छवि शामिल रही।

 

11 जून 2000 को एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका जीवन आज भी संघर्ष, साहस और नेतृत्व की प्रेरक कहानी के रूप में याद किया जाता है।

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