टोंक जिले के ग्रामीण पीने के पानी के लिए जूझ रहे, बीसलपुर पाइपलाइन तीन साल से टूटी

Edited By Anil Jangid, Updated: 07 Jun, 2026 06:09 PM

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टोंक: जिले के ग्रामीण इलाकों में अधिकारियों की लापरवाही के कारण पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। बनेठा क्षेत्र में बीसलपुर योजना की पाइपलाइन मौजूद होने के बावजूद ग्रामीणों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। ईसरदा डेम परियोजना के दौरान टूटी...

टोंक: जिले के ग्रामीण इलाकों में अधिकारियों की लापरवाही के कारण पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। बनेठा क्षेत्र में बीसलपुर योजना की पाइपलाइन मौजूद होने के बावजूद ग्रामीणों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। ईसरदा डेम परियोजना के दौरान टूटी मुख्य पाइपलाइन तीन साल से मरम्मत के अभाव में ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि बीसलपुर योजना के बावजूद उन्हें फ्लोराइड युक्त खारा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों सहित सभी लोग तीन साल से पानी के बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। पानी की कमी के कारण ग्रामीण महंगे टैंकरों पर निर्भर हैं, जो भी फ्लोराइड युक्त पानी लेकर आते हैं।

 

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    स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और 181 पोर्टल के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। ग्रामीण अधिकारियों की लापरवाही से परेशान हैं और बीसलपुर परियोजना से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

     

    पानी की गंभीर कमी ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है। खेतों और घरों में पानी की कमी के कारण न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, बल्कि दैनिक जीवन भी कठिन हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में हड्डियों और दांतों की समस्याओं के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

     

    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर पाइपलाइन की मरम्मत और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था जल्द नहीं की गई, तो वे जोरदार आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनकी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और उन्हें तात्कालिक रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

     

    यह मामला टोंक जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी और सरकारी लापरवाही की गंभीर समस्या को उजागर करता है। प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि वह आमजन को पीने के लिए सुरक्षित पानी उपलब्ध कराए और लंबित मरम्मत कार्य को प्राथमिकता से पूरा करे।‌

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