टोंक: निवाई में वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, अवैध डंपरों को लेकर लोगों में भारी आक्रोश

Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jul, 2026 02:44 PM

questions raised over forest department action in tonk niwai

टोंक: टोंक जिले के निवाई कस्बे में झिंकरे (मलबा) से भरे डंपरों को लेकर सामने आया एक मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि वन विभाग ने दो डंपरों को रोककर जांच की, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद वन विभाग के साथ-साथ पुलिस...

टोंक: टोंक जिले के निवाई कस्बे में झिंकरे (मलबा) से भरे डंपरों को लेकर सामने आया एक मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि वन विभाग ने दो डंपरों को रोककर जांच की, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद वन विभाग के साथ-साथ पुलिस और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

जानकारी के अनुसार, निवाई वन विभाग के रेंजर धारीलाल बैरवा ने दशहरा मैदान के पास झिंकरे से भरे दो डंपरों को रोककर दस्तावेजों की जांच की। वन विभाग का दावा है कि जांच के दौरान वाहनों के पास वैध रवन्ना (ट्रांजिट परमिट) पाया गया, जिसके बाद उन्हें जाने दिया गया। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इसी दौरान एक अन्य डंपर अधिकारियों को देखकर मौके से फरार हो गया। इस दावे ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मामले में एक और विवाद तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खनिज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए। आरोप है कि एक डंपर की नंबर प्लेट पर कालिख पुती हुई थी और उपलब्ध वाहन नंबर के आधार पर संबंधित रवन्ना सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और इनकी जांच की जानी बाकी है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामला पूरी तरह स्पष्ट था तो मौके पर खनिज विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त जांच के लिए क्यों नहीं बुलाया गया। लोगों का आरोप है कि यदि सभी संबंधित विभाग मौके पर मौजूद होते तो किसी भी प्रकार के विवाद या संदेह की स्थिति नहीं बनती। इसी वजह से अब पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है।

 

घटना के दौरान मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों का वन रेंजर धारीलाल बैरवा ने कैमरे पर जवाब नहीं दिया। दूसरी ओर, सहायक वन संरक्षक (ACF) टोंक अनुराग महर्षि ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वाहनों के दस्तावेज पूरी तरह वैध थे तो सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों में विरोधाभास क्यों दिखाई दे रहा है? यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? वहीं, यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

 

फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे घटनाक्रम में नियमों का पालन हुआ या नहीं और क्या किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही हुई है।

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